नाली है तो बदबू ही करेगी, गोबर कहाँ डालेंगे?’ — जनता के सवाल पर वार्ड 10 के पार्षद का गैर-जिम्मेदाराना बयान,
मामला: नाली जाम होने और बदबू से परेशान मोहल्ला वासियों ने पार्षद से की थी शिकायत।
रिपोर्टर संगीता सिंह
‘नाली है तो बदबू ही करेगी, गोबर कहाँ डालेंगे?’ — जनता के सवाल पर वार्ड 10 के पार्षद का गैर-जिम्मेदाराना बयान, आक्रोश
मुख्य बिंदु:
मामला: नाली जाम होने और बदबू से परेशान मोहल्ला वासियों ने पार्षद से की थी शिकायत।
विवादित बयान: पार्षद शिव वर्मा ने कहा— “गोबर नाली में नहीं डालेंगे तो कहाँ डालेंगे?”
जनता का रुख: पार्षद के अड़ियल रवैये से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल।
विशेष संवाददाता, [राजनंदगांव ]
शहर के वार्ड नंबर 10 में सफाई व्यवस्था को लेकर भड़की जनता को उस समय गहरा झटका लगा, जब उनके चुने हुए जनप्रप्रतिनिधि ने ही समस्या का समाधान करने के बजाय हाथ खड़े कर दिए। वार्ड नंबर 10 के पार्षद शिव वर्मा का एक कथित बयान इस समय पूरे क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले काफी समय से वार्ड नंबर 10 के एक मोहल्ले में नालियाँ पूरी तरह चोक हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में बदबू और मच्छरों के आतंक से मोहल्ला वासियों का जीना मुहाल हो चुका है। बीमारी फैलने के डर से जब परेशान नागरिकों का एक प्रतिनिधिमंडल पार्षद शिव वर्मा के पास शिकायत लेकर पहुँचा, तो उम्मीद के विपरीत उन्हें पार्षद के तीखे तेवरों का सामना करना पड़ा।
“नाली है तो बदबू ही करेगी…”
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब मोहल्ले के लोगों ने नाली में गोबर बहाए जाने और उससे आ रही असहनीय बदबू की शिकायत की, तो पार्षद शिव वर्मा बिफर गए। उन्होंने दो टूक शब्दों में जनता से कहा:
“अगर गोबर नाली में नहीं डालेंगे तो कहाँ डालेंगे? और नाली है तो बदबू ही करेगी।”
पार्षद का यह अजीबोगरीब तर्क सुनकर वहाँ मौजूद लोग अवाक रह गए। जनता का कहना है कि सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी जिस जनप्रतिनिधि की है, वही गंदगी को सही ठहराने पर तुला हुआ है।
स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश
पार्षद के इस बयान के बाद मोहल्ले के लोगों में भारी गुस्सा है। स्थानीय निवासियों का कहना है:
सफाई टैक्स का अपमान: “हम सरकार को टैक्स देते हैं ताकि हमें साफ-सुथरा माहौल मिले, इसलिए नहीं कि पार्षद हमें गंदगी के साथ समझौता करना सिखाएं।”
स्वास्थ्य का खतरा: नालियों में गोबर जमा होने से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन प्रशासन मौन है।
प्रशासनिक दखल की मांग
स्वच्छ भारत अभियान के दावों के बीच एक पार्षद का ऐसा बयान नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर नगर निगम के उच्च अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं और वार्ड नंबर 10 की जनता को इस नरकीय स्थिति से कब तक मुक्ति मिलती है।



