जिला अस्पताल पेंड्री में अव्यवस्था का आलम: 2 दिनों से नल सूखे, मरीज और तीमारदार बूंद-बूंद पानी को तरसे
राजनंदगांव।
जिला अस्पताल पेंड्री (राजनंदगांव) में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। अस्पताल परिसर पिछले दो दिनों से भारी जलसंकट से जूझ रहा है। नलों में पानी न आने के कारण अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे मरीज और उनके परिजनों (तीमारदारों) को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि 48 घंटे बीत जाने के बाद भी अस्पताल प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, शौचालय जाने तक के लिए मोहताज
अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके साथ आए परिजनों का कहना है कि पिछले दो दिनों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। पीने के पानी से लेकर दैनिक कार्यों और शौचालयों तक में पानी की एक बूंद उपलब्ध नहीं है।
दूर से लाना पड़ रहा पानी: मरीजों के परिजन बाहर से पानी की बोतलें और बाल्टियां खरीदकर या दूर-दराज के हैंडपंपों से पानी लाने को मजबूर हैं।
संक्रमण का खतरा बढ़ा: पानी न होने के कारण अस्पताल के शौचालयों में गंदगी का अंबार लग गया है, जिससे मरीजों में संक्रमण (Infection) फैलने का खतरा और अधिक बढ़ गया है।
प्रशासन की लापरवाही पर उठ रहे सवाल
एक तरफ सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर मूलभूत सुविधा ‘पानी’ का न होना प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करता है। भीषण गर्मी और बीमारी के दौर में पानी की इस किल्लत ने मरीजों की तकलीफ को दोगुना कर दिया है।
मरीजों के परिजनों का फूटा गुस्सा:
“हम यहाँ अपने मरीज का इलाज कराने आए हैं या पानी की तलाश में भटकने? दो दिन से नलों में पानी नहीं है। शिकायत करने पर भी कोई सुनने वाला नहीं है। अस्पताल प्रशासन को मरीजों की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं दिख रहा।”
— एक पीड़ित परिजन
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस पूरे मामले में जब अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई, तो हमेशा की तरह ‘तकनीकी खराबी’ और ‘जल्द सुधार’ का रटा-रटाया आश्वासन मिला। लेकिन सवाल यह उठता है कि दो दिनों के भीतर वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे वॉटर टैंकर) क्यों नहीं कराई गई? क्यों मरीजों को इस तरह बेहाल होने के लिए छोड़ दिया गया?
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का तत्काल निराकरण किया जाए, अन्यथा वे अस्पताल परिसर में उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

