सरेआम नशा, सन्नाटे में कानून
गली-मोहल्लों में बिक रहा अवैध गांजा और शराब, शाम ढलते ही लगता है उपद्रवियों का जमावड़ा

क्राइम रिपोर्टर ,संगीता सिंह [ राजनंदगांव]
[08/06/2026]:
सरेआम नशा, सन्नाटे में कानून: गली-मोहल्लों में बिक रहा अवैध गांजा और शराब, शाम ढलते ही लगता है उपद्रवियों का जमावड़ा
शहर के रिहायशी इलाकों और शांत गलियों में इन दिनों खौफ और असुरक्षा का माहौल है। कारण है—गली-मोहल्लों में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब और गांजा। जैसे ही सूरज ढलता है, इन इलाकों की सूरत बदल जाती है। मुख्य चौराहों, संकरी गलियों और अंधेरे कोनों में नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का मजमा (जमावड़ा) लगना शुरू हो जाता है।
हालत यह हो चुकी है कि आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों का शाम के बाद घरों से निकलना दूभर हो गया है।
दहशत के साए में जीने को मजबूर लोग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नशा करने के बाद ये लड़के हुड़दंग मचाते हैं। बीच सड़क पर खुलेआम गाली-गलौज करना, राहगीरों पर फब्तियां कसना और विरोध करने पर जान से मारने की धमकियां देना अब यहां की रोज की कहानी बन चुका है। अगर कोई नागरिक इस गुंडागर्दी के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत करता है, तो उसे पूरे गैंग के गुस्से का सामना करना पड़ता है। लोग अपने ही घरों में डर के साए में जीने को मजबूर हैं।
प्रशासन की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली है। इतने बड़े पैमाने पर अवैध नशे का कारोबार और खुलेआम गुंडागर्दी बिना किसी डर के चल रही है, जिससे पुलिस की मुस्तैदी और खुफिया तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा होता है।
निवासियों का दर्द: “क्या पुलिस वाकई इस बात से अनजान है कि किस गली में गांजा बिक रहा है और कहां अवैध शराब की पेटी उतर रही है? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? जब सब कुछ सरेआम हो रहा है, तो पुलिस की ‘कड़क कार्रवाई’ सिर्फ कागजों तक ही क्यों सीमित है?”
गश्त के नाम पर सिर्फ औपचारिकता!
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का आरोप है कि पुलिस की पीसीआर वैन या गश्ती दल कभी-कभार ही चक्कर लगाते हैं, और उनके आने की भनक उपद्रवियों को पहले ही लग जाती है। पुलिस के जाते ही महफिल फिर से सज जाती है।
इस सुस्ती ने अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि उन्हें अब कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है।
जनता की मांग: अब खोखले दावों से काम नहीं चलेगा
इलाके के लोगों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। नागरिकों की मांग है कि:
तत्काल प्रभाव से चिन्हित नशा तस्करों के ठिकानों पर छापेमारी की जाए।
शाम के समय पुलिस की पैदल गश्त बढ़ाई जाए।
सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन संदिग्ध इलाकों की निगरानी हो।
निष्कर्ष:
अगर प्रशासन ने समय रहते इस ‘सफेद जहर’ और पनपते अपराध पर लगाम नहीं लगाई, तो यह शांत इलाका जल्द ही किसी बड़ी आपराधिक वारदात का गवाह बन सकता है। अब देखना यह है कि इस समाचार के बाद भी पुलिस कुंभकर्णी नींद सोती रहती है या अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाती है।112 की गाड़िया पहले डिपार्टमेंट के स्टॉफ के घर के सामान और उनकी दारु पार्टी और आराम से लिए इस्तेमाल की जाती थी और अभी जो 112 डिपार्टमेंट को बीजेपी सरकार द्वारा प्रदान की गई है उसमे भी जगह पे सिटी के सिटी में 25 मिनट में पहुंच रहे ऊपर से कही कोई घटना हो रही तो वो उनका काम नहीं है बोल रहे, सम्बंधित थाने की पुलिस अगर नहीं पहुंच पा रही कही दारु और गांजे पीके लड़के लोग तमाशे कर रहे उसके लिए कॉल किया गया 112 में वहां टीम पहुंची तो बोलती है ये थाने का काम है हमारा नहीं है तो 112:क्या इनको डीजल फुकने के लिए प्रदान की गई SP साहिबा अच्छे से इन बातो को संज्ञान में लीजिये और विभाग की छवि को सुधारिये
सीजी डायल 112 के मुख्य कार्य:*
*1. पुलिस सहायता:*
आपराधिक घटनाओं, चोरी, दंगे, या किसी भी आपातकालीन सुरक्षा स्थिति में तत्काल पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंचता है।
*2. चिकित्सा आपातकाल (Medical Emergency):*
गंभीर रूप से बीमार, सड़क दुर्घटना में घायल या अन्य स्वास्थ्य संकट की स्थिति में मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस सेवा प्रदान करना।
*3. अग्निशमन सेवाएं (Fire Brigade):*
आगजनी या अचानक आग लगने की दुर्घटनाओं पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम को भेजना।
*4. महिला एवं बाल सुरक्षा:*
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराध या घरेलू हिंसा के मामलों में तुरंत रेस्क्यू टीम और महिला पुलिस की सहायता उपलब्ध कराना।
*5. आपदा प्रबंधन:*
बाढ़, भूकंप, या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा के समय फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालना और सहायता देना।

