*संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा कमरछठ का व्रत,
जगह-जगह पूजनोत्सव की धूम।*

*संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा कमरछठ का व्रत, जगह-जगह पूजनोत्सव की धूम।*

*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव।*
संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना का पावन पर्व *कमरछठ* (हलषष्ठी) पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और अपार उत्साह के साथ मनाया गया। तड़के से ही माताओं में व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। निर्जला व्रत रखकर महिलाओं ने अपनी संतान की रक्षा और उन्नति के लिए प्रार्थना की।

शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सामूहिक पूजन के लिए विशेष ‘सगरी’ (छोटा कुंड) का निर्माण किया गया था। दीनदयाल उपाध्याय कॉलोनी, चिखली शिव मंदिर सहित विभिन्न क्षेत्रों और कॉलोनियों में माताओं ने सगरी की स्थापना कर पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना की।
पूजन विधान और कथा श्रवण
पूजन स्थल पर माताओं ने सगरी में जल भरकर कांसी, महुआ, पसहर चावल, चना, गेहूं और छह प्रकार की भाजियों का अर्पण किया। पंडितों द्वारा हलषष्ठी की पौराणिक व्रत कथा सुनाई गई, जिसे माताओं ने पूरी तन्मयता से सुना। पूजा समापन के बाद माताओं ने अपनी संतान के कंधे और पीठ पर पसहर चावल और कपड़े से ‘छटका’ (थपकी) लगाकर उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद दिया।
पसहर चावल से तोड़ा व्रत
कमर छटका के व्रत में बिना हल चले उगने वाले अनाजों का ही विशेष महत्व होता है। शाम को पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने पसहर चावल, महुआ और छह प्रकार की सब्जियों का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत पूर्ण किया। दिनभर बाजारों में भी महुआ के पत्ते, कांसी के फूल और पसहर चावल की बिक्री को लेकर रौनक बनी रही।

