मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ से सफर हुआ आसान
पहली बार यात्री बस सुविधा से जुड़े 330 गांव: दुर्गम क्षेत्रों में बदली तस्वीर

गोविंद साहू/रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रारंभ की गई ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा’ आज सुदूर अंचलों के लिए विकास और विश्वास की नई पहचान बन चुकी है. यह योजना केवल परिवहन सुविधा बस नहीं हैं यह दूरस्थ, पहाड़ी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है. जहां पहले आवागमन के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं दूर थी, वहीं अब नियमित बस सेवा ने ग्रामीण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की नई लहर पैदा कर दी है.कब हुई थी इस योजना की शुरुआत इस महत्वाकांक्षी सेवा की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जगदलपुर में इस योजना की शुरुआत करते हुए बसों को हरी झंडी दिखाई थी। प्रथम चरण में 34 बसें 34 मार्गों पर संचालित की गईं, जिससे लगभग 250 गांव सीधे जुड़ गए. इसके बाद दूसरे चरण में 24 नई बसें 23 अतिरिक्त मार्गों पर शुरू की गईं, जिससे लगभग 180 गांवों को लाभ मिला.जनवरी 2026 तक कुल 57 मार्गों पर बस संचालन प्रारंभ हो चुका है और लगभग 330 गांव इस सेवा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ चुके हैं. सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 तक बसों की संख्या 200 तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो इस योजना के प्रति सरकार की गंभीरता और दूरदर्शिता को दर्शाता है.बस्तर और सरगुजा को मिली विकास की नई रफ्तारयह योजना विशेष रूप से वनांचल क्षेत्रों, बस्तर और सरगुजा के लिए वरदान साबित हो रही है. इन क्षेत्रों में वर्षों से परिवहन सुविधा का अभाव था, जिसके कारण ग्रामीणों को जिला मुख्यालय, अस्पताल, कॉलेज या बाजार तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. अब कोण्डागांव, जशपुर, पूर्वर्ती, और अन्य दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन उपलब्ध हो रहा है. छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल और कॉलेज पहुंच पा रहे हैं. मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल रहा है. ग्रामीणों को बाजार, तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंचने में अब घंटों पैदल चलने या निजी साधनों पर निर्भर रहने की मजबूरी नहीं रही।पारदर्शिता और जवाबदेही का मॉडल,मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शी निविदा प्रक्रिया है. चयनित मार्गों पर बस संचालन के लिए विधिवत निविदा आमंत्रित की जाती है. न्यूनतम वित्तीय दर प्रस्तावित करने वाले पात्र आवेदक का चयन किया जाता है, जिससे शासन पर न्यूनतम वित्तीय भार पड़े और सेवा दीर्घकालीन रूप से सतत बनी रहे. चयन के बाद विधिवत परमिट आवेदन प्राप्त कर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जाती है और नियमानुसार बस संचालन की अनुमति प्रदान की जाती है. इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियम पालन सुनिश्चित होता है.प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता से संचालकों को प्रोत्साहन,राज्य सरकार बस संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है. इसमें प्रथम वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, द्वितीय वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर और तृतीय वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर है. इस वित्तीय मॉडल से निजी संचालकों को प्रोत्साहन मिलता है और ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा निरंतर चलती रहती है. मार्ग चयन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा और राज्य स्तरीय समिति की स्वीकृति के आधार पर किया जाता है, जिससे वास्तविक आवश्यकता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके.नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए आधा किराया, दिव्यागों के लिए निःशुल्क,टिकट बस में सीधे कंडक्टर या चालक से प्राप्त किया जा सकता है. साथ ही विशेष छूट के अंतर्गत दृष्टिहीन, बौद्धिक रूप से दिव्यांग, दोनों पैरों से असमर्थ दिव्यांग, 80 वर्ष से अधिक वरिष्ठ नागरिक और एड्स रोगी मुफ्त यात्रा कर सकते हैं. इसके अलावा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के यात्री आधा किराया देकर यात्रा कर सकते हैं. यह सेवा सभी के लिए उपलब्ध है, जो जिला और तहसील मुख्यालयों की यात्रा करते हैं. वर्तमान में बस्तर, सुकमा, कोण्डागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा, जशपुर, बलरामपुर, कोरिया, सूरजपुर और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिलों में कुल 57 बसें संचालित हो रही हैं.
मुख्यमंत्री बस सेवा योजना’ के लिए बजट में 10 करोड़ का प्रावधान छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने मंगलवार, 24 फरवरी को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया. विष्णुदेव साय सरकार का तीसरा बजट 1.72 लाख करोड़ रुपये का पेश किया गया. यह बजट ‘संकल्प’ थीम पर आधारित है, जिसमें समावेशी विकास एवं अवसंरचना को तेज करना और निवेश को बढ़ावा देना शामिल है. वित्त मंत्री ने बजट में महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा को और मजबूत किया जाएगा.सीएम साय बोले- विकास का विस्तार अंतिम छोर तक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ केवल परिवहन सुविधा बस नहीं है यह सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बन चुकी है. यह योजना ग्रामीण नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं तक सुगम पहुंच सुनिश्चित कर रही है. सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि विकास केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति तक पहुंचेगा. यह पहल “सशक्त गांव, सशक्त छत्तीसगढ़” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत और ऐतिहासिक कदम है. ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब सरकार की नीयत और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की रफ्तार पहाड़ों और जंगलों को भी पार कर जाती है.!!




