कुम्हारों को मटके-मूर्तियों के लिए नहीं मिल रही मिट्टी,

अमित जैन मण्डीदीप औद्योगिक नगर सहित जिले में ईंट भट्ठों का अवैध कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। हालात यह हैं कि कुम्हारों और प्रजापति समाज को परंपरागत रूप से मिट्टी के बर्तन और मूर्तियां बनाने के लिए मिट्टी की जरूरत होती है। उन्हें ही पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल पा रही है। दूसरी ओर, उनके नाम की आड़ में प्रभावशाली लोग सैकड़ों ईंट भट्ठे चला रहे हैं। अनुमान है कि तहसील में ही 100 से ज्यादा ईंट भट्ठे बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं। नदियों, तालाबों और छोटे नालों के आसपास की राजस्व और वन भूमि से बेधड़क मिट्टी की खुदाई की जा रही है। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। राजस्व और वन विभाग को भी लाखों रुपए की हानि हो रही है। प्रशासनिक अधिकारियों को इस स्थिति की जानकारी है। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। भट्ठा संचालकों के हौसले बुलंद हैं। नियमों के अनुसार ईंट भट्ठा संचालन की अनुमति मुख्यतः एससी-एसटी और प्रजापति समाज के लोगों को दी जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके नाम का उपयोग कर दूसरे समाज के प्रभावशाली लोग कारोबार चला रहे हैं। प्रजापति समाज के सुरेश प्रजापति ने बताया कि कुम्हारों को मटके और मूर्तियां बनाने के लिए भी मिट्टी नहीं मिल रही है। पिछले पांच-छह वर्षों से समाज की ओर से कलेक्टर को आवेदन दिए जा रहे हैं। समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि प्रजापति समाज के नाम की आड़ में अवैध भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए ।



