
*श्री रामचन्द्र ही पुनः श्रीरामकृष्ण के रूप में अवतरित हुए थे-स्वामी मुक्तिनाथानन्द *
लखनऊ.राम नवमी उत्सव बड़े ही धार्मिक माहौल में पारम्परिक एवं पूर्ण रीतिरिवाजो के साथ विधिवत अनुष्ठानिक प्रक्रिया से रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ में भक्तगणों की भागीदारी एवं उत्साह के साथ मनाया गया। भक्तगणों की सतत् भागीदारी के साथ सूर्योदय से सूर्यास्त तक निरन्तर जप-यज्ञ, (बारी-बारी से इच्छुक भक्तगणों द्वारा भगवान का निरन्तर नाम जपन) का आयोजन रामकृष्ण मठ के पुराने मंन्दिर में प्रत्यक्ष रूप व परोक्ष रूप से इन्टरनेट के माध्यम से सम्मिलित होकर हुआ .
उत्सव का शुभारम्भ रामकृष्ण मठ के मुख्य मन्दिर में प्रातः 5 बजे मंगल आरती द्वारा हुआ। वैदिक मंन्त्रोंच्चारण एवं गीता पाठ मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज के नेतृत्व में हुआ।प्रातः 7ः15 बजे श्री रामचन्द्र स्वयं श्री रामकृष्ण देव के रूप में पुनः अवतरित हुए थे’ विषय पर विशेष सत प्रसंग स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने दिया।उन्होंने कहा कि काशीपुर के बगीचे में स्वामी विवेकानन्द ने यह महावाक्य भगवान श्रीरामकृष्ण के श्रीमुख से सुना था। इस महावाक्य का स्मरण कर स्वामीजी ने विलायत से कलकत्ते में लौटने के बाद बेलुड़ मठ में एक स्तोत्र की रचना की थी। स्तोत्र में उन्होंने कहा है – जो आचण्डाल दीन-दरिद्रों के मित्र, जानकीवल्लभ, ज्ञान-भक्ति के अवतार श्रीरामचन्द्र हुए, जिन्होंने फिर श्रीरामकृष्ण के रूप में कुरुक्षेत्र में गीतारूपी गम्भीर मधुर सिंहनाद किया था, वे ही इस समय विख्यात पुरुष श्रीरामकृष्ण के रूप में अवतीर्ण हुए हैं।
भगवान समय-समय पर विभिन्न रूपों में प्रकट होकर धर्म की स्थापना करते हैं। श्री रामचन्द्र ने त्रेता युग में मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन का संदेश दिया, जबकि श्री रामकृष्ण देव ने कलियुग में भक्ति, प्रेम और सभी धर्मों की एकता का मार्ग दिखाया।
रामनवमी उत्सव में रामकृष्ण मठ के स्वामी विश्वदेवानन्द ने चण्डी पाठ किया। विशेष पूजा की शुरूआत स्वामी इष्टकृपानन्दजी द्वारा प्रातः बजे हुई तथा विस्तृत ‘षोड़शोपचार पूजा’ हुआ जिसमें भगवान की पूजा सोलह तरह के विभिन्न पूज्य सामग्रियों द्वारा किया गया उस दौरान भक्तिगीत कानपुर के अशोक मुखर्जी तथा तबले पर संगत लखनऊ के शुभम राज ने दिया। तदनन्तर हवन किया गया तथा इस अवसर पर प्रभु को पुष्पांजलि अर्पित कर उनका आर्शिवाद प्राप्त किया गया।
कार्यक्रम का समापन उपस्थित सभी भक्तों के मध्य प्रसाद वितरण के साथ हुआ।




