गुणवत्तापूर्ण मातृ देखभाल में दाइयों की भूमिका अग्रणी: स्वामी मुक्तिनाथानन्द
अमित चावला /लखनऊ.

विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक स्कूल और कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा मनाया गया अंतरराष्ट्रीय मिडवाइव्स दिवस
लखनऊ.विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक स्कूल और कॉलेज ऑफ नर्सिंग, लखनऊ ने अंतर्राष्ट्रीय मिडवाइव्स दिवस के उपलक्ष्य में एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का विषय था – वन मिलियन मोर मिडवाइव्स – गुणवत्तापूर्ण मातृ देखभाल की वैश्विक मांग को पूरा करना।यह कार्यक्रम विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, (वीपीआईएमएस), लखनऊ के सेमिनार हॉल में आयोजित किया गया था। इस कार्यशाला ने देश को मातृ और नवजात मृत्यु दर तथा रुग्णता दर को कम करने में दाइयों की भूमिका के प्रति आश्वस्त किया, और दाइयों को उनका उचित सम्मान व पहचान दिलाने पर जोर दिया।
उद्घाटन सत्र की शोभा स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज, सचिव, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ की गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाई, वे इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे साथ ही विशिष्ट अतिथियों में भूमिका सिंह (नर्सिंग संकाय, एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ), डॉ. श्रीविद्या (कंसल्टेंट, वीपीआईएमएस) और डॉ. एन. वेंकटलक्ष्मी (प्राचार्य, विवेकानंद पॉलीक्लिनिक स्कूल एवम् कॉलेज ऑफ नर्सिंग) शामिल थीं।
इस सत्र की शुरुआत सदाफ (एमएससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष की छात्रा) के स्वागत भाषण से हुई। सत्र का मुख्य आकर्षण स्वामी मुक्तिनाथानंद महाराज (सचिव, वीपीआईएमएस) का प्रेरणादायक भाषण था अपने इस प्रेरक संबोधन में उन्होंने प्रसव के दौरान सुरक्षित मातृ स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए देश भर की सभी दाइयों द्वारा किए जा रहे अग्रणी कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कार्यशाला का प्रथम सत्र प्रख्यात वक्ता सुश्री भूमिका सिंह (नर्सिंग संकाय, एसजीपीआईएमएस) द्वारा आगे बढ़ाया गया, जिन्होंने वन मिलियन मोर मिडवाइव्स गुणवत्तापूर्ण मातृ देखभाल की वैश्विक मांग को पूरा करनाष् विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। अपने भाषण के दौरान उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दाई का कार्य (मिडवाइव्स) कला, विज्ञान, अनुभव और सहज बोध का एक अनूठा संगम है।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. श्रीविद्या एम. (कंसल्टेंट, वीपीआईएमएस) ने की। इस सत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जन्म केवल शिशु को जन्म देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जन्म का अर्थ है माताओं को सशक्त, सक्षम और समर्थ बनाना-ऐसी माताएँ जो स्वयं पर विश्वास करती हैं और अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचानती हैं।
इसके पश्चात् सत्र को विशिष्ट वक्ता डॉ. एन. वेंकट लक्ष्मी (प्राचार्य, विवेकानंद पॉलीक्लिनिक स्कूल और कॉलेज ऑफ नर्सिंग) ने आगे बढ़ाया, जिन्होंने ‘दाइयों की भूमिका और उत्तरदायित्व’ विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने व्याख्यान में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि एक दाई के पास ‘एक महिला के हाथ, एक बाज की नजर और एक शेर का दिल’ होना चाहिए।
चौथा वर्किंग सेशन एक सिनेरियो-बेस्ड रोल प्ले के साथ आगे बढ़ा, जिसका विषय था-‘जन्म से लेकर जीवन तक – पहले ‘गोल्डन आवर’ में नवजात शिशु की जरूरी देखभाल में नर्सों की भूमिका। इस सेशन की अध्यक्षता स्त्री एव प्रसूति विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष श्रीमती सरिता और विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिग की एसोसिएट प्रोफेसर श्रीमती शेफाली ने की। कार्यक्रम का सफल समापन एमएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष की छात्रा सुश्री चेतना द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



