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विवेकानंद अस्पताल का होम्योपैथी विभाग कर रहा गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का सटीक इलाज

जब उपचार की संभावनाएँ सीमित प्रतीत होती हैं, तब होम्योपैथी आशा की एक किरण बन सकती है:स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज

विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, निराला नगर, लखनऊ के होम्योपैथी विभाग में जटिल एवं दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल रोगों के उपचार में सकारात्मक एवं उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। यह सेवा संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज के मार्गदर्शन तथा डॉ. अमित पाण्डेय, विभागाध्यक्ष, होम्योपैथी विभाग, के नेतृत्व में संचालित की जा रही है।

हाल ही में सुरेश कुमार, निवासी कीरतपुर, जनपद बाराबंकी , न्यूरो की गंभीर बीमारी के कारण उत्पन्न ग्लायोसिस से पीड़ित थे, ने होम्योपैथिक उपचार के पश्चात अपने स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार का अनुभव किया। लंबे समय से न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे श्री सुरेश कुमार के दैनिक जीवन पर इस रोग का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। नियमित होम्योपैथिक परामर्श, रोगी की व्यक्तिगत प्रकृति एवं लक्षणों के आधार पर औषधि चयन तथा निरंतर अनुवर्ती उपचार के परिणामस्वरूप उनकी स्थिति में संतोषजनक सुधार देखने को मिला। इस परिवर्तन ने न केवल रोगी एवं उनके परिवार में नई आशा का संचार किया, बल्कि अन्य जटिल रोगियों के लिए भी प्रेरणा का कार्य किया।

इसी सफलता से प्रेरित होकर सुमेली दास , जो भूगोल विषय की पीएच.डी. शोधार्थी हैं तथा वर्तमान में विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान के होम्योपैथी विभाग में उपचार प्राप्त कर रही हैं।

लगभग 19 वर्ष पूर्व, मात्र 23 वर्ष की आयु में, सुश्री सुमेली दास एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हुई थीं। दुर्घटना के परिणामस्वरूप उन्हें गंभीर मस्तिष्कीय चोट लगी और वे लगभग 19 दिनों तक कोमा में रहीं। उनके जीवन को बचाने के लिए विभिन्न अस्पतालों में 20 से अधिक शल्य-चिकित्साएँ की गईं। यद्यपि इन उपचारों से उनका जीवन सुरक्षित रहा, किन्तु दुर्घटना के दीर्घकालिक प्रभावों ने उनकी सामान्य कार्यक्षमता, शारीरिक संतुलन तथा दैनिक गतिविधियों को प्रभावित किया।

वर्तमान में वे डॉ. अमित पाण्डेय के मार्गदर्शन में होम्योपैथिक उपचार के अंतर्गत हैं। उनके परिवार तथा चिकित्सक दल को आशा है कि समग्र, व्यक्ति-केंद्रित एवं दीर्घकालिक होम्योपैथिक चिकित्सा के माध्यम से उनके स्वास्थ्य, कार्यक्षमता तथा जीवन-गुणवत्ता में निरंतर सुधार होगा और वे भविष्य में अपनी सामान्य दैनिक गतिविधियों को और अधिक स्वतंत्रता एवं आत्मविश्वास के साथ संपादित कर सकेंगी।

डॉ. अमित पाण्डेय कहते हैं कि होम्योपैथी का उद्देश्य केवल रोग के लक्षणों का उपचार करना नहीं, बल्कि रोगी के सम्पूर्ण व्यक्तित्वकृशारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक पक्षकृको ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य की पुनर्स्थापना करना है। जटिल एवं दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल रोगों में भी रोगी-विशेष के अनुरूप चयनित उपचार से अनेक बार उत्साहजनक परिणाम प्राप्त होते हैं। प्रत्येक रोगी की प्रतिक्रिया भिन्न होती है, इसलिए उपचार के परिणाम भी व्यक्ति-विशेष के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

राजस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने कहा कि ‘‘चिकित्सा सेवा मानव सेवा का ही एक स्वरूप है। स्वामी विवेकानन्द के ‘नर सेवा नारायण सेवा’ के आदर्श को आत्मसात करते हुए संस्थान का प्रयास है कि प्रत्येक रोगी को करुणा, समर्पण एवं सेवा-भाव के साथ सर्वाेत्तम चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए। चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि रोगी को आशा, आत्मविश्वास और बेहतर जीवन प्रदान करना भी है।जब उपचार की संभावनाएँ सीमित प्रतीत होती हैं, तब होम्योपैथी आशा की एक किरण बन सकती है.

विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज का होम्योपैथी विभाग भविष्य में भी जटिल एवं दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित मरीजों को समग्र, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है .

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