*मावा की मिठाई वालों पर मेहरबानी,चाय-पोहा वालों पर कार्यवाही*क्यों ?
*खाघ अधिकारी-खाद्य विभाग की कार्यवाही का पैमाना एक जैसा क्यों नहीं ?

*मावा की मिठाई वालों पर मेहरबानी,चाय-पोहा वालों पर कार्यवाही*क्यों ?
*खाघ अधिकारी-खाद्य विभाग की कार्यवाही का पैमाना एक जैसा क्यों नहीं ?
✍️भारत संवाद ✍️
कालापीपल(बब्लू जायसवाल)खाद्य सुरक्षा को लेकर कार्यवाही जरूरी है,लेकिन अब सवाल कार्यवाही की निष्पक्षता और दायरे को लेकर उठने लगे हैं,कालापीपल में चाय-पोहा बेचकर रोजी-रोटी चलाने वाले छोटे होटल संचालकों पर कार्यवाही नजर आती है,तो दूसरी ओर मावे और मिठाइयों का कारोबार एवं बड़े किराना व्यापारीयों के प्रतिष्ठानों को लेकर लोगों के मन में सवाल है*क्या जांच का पैमाना सभी के लिए एक जैसा है ?
लोगों का कहना है कि यदि खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता ही कार्यवाही का आधार है,तो फिर चाय-पोहा की छोटी दुकान से लेकर मावा-मिठाई की बड़ी दुकान तक हर प्रतिष्ठान की समान रूप से जांच क्यों नहीं की गई।
वास्तव में पूरे बाजार की व्यापक जांच की जा रही है ?हाल में कालापीपल की चार फर्मों पर खाद्य सुरक्षा एवं राजस्व विभाग की संयुक्त कार्यवाही की जानकारी सामने आई है,**कितनी दुकानों की जांच हुई,कितने सैंपल लिए गए और किन-किन प्रतिष्ठानों पर कार्यवाही प्रस्तावित है।
*क्योंकि सवाल छोटा है, लेकिन जवाब बड़ा होना चाहिए*
“अगर नियम सबके लिए बराबर हैं,तो कार्यवाही*सब पर बराबर क्यों नहीं ?”
*अधिकारी जी,जनता जवाब चाहती है,मावा-मिठाई एवं किराना दुकान वालों की बारी कब आएगी ?
अंत में:-वर्षभर दुष्त खाद्य सामग्री बाजारों में खुलेआम दुकानदारों द्वारा बेची जाती है और खाद्य अधिकारियों की नींद सिर्फ कलेक्टर के आदेश पर या त्योहारों के समय ही खोलती है,इस कार्यवाही से तो स्पष्ट होता है कि कार्यवाही के नाम पर सिर्फ रसमलाई की जती है।




