भिलाई 3 चरौदा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा फर्जी नीलामी और निजी अस्पताल का खेल
तात्कालिक सभापति कृष्णा चंद्राकर पर पद के दुरुपयोग का आरोप, निगम आयुक्त का गोलमोल जवाब

*भिलाई 3 चरौदा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा फर्जी नीलामी और निजी अस्पताल का खेल*
*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव*
तात्कालिक सभापति कृष्णा चंद्राकर पर पद के दुरुपयोग का आरोप, निगम आयुक्त का गोलमोल जवाब
भिलाई-3: भिलाई-3 के बजरंग पारा क्षेत्र में खसरा नंबर 381/1 से लेकर 381/6 तक स्थित बेशकीमती शासकीय (सरकारी) भूमि पर अवैध कब्जे निर्माण और उस पर गैर-कानूनी ढंग से निजी अस्पताल संचालन का एक गंभीर व सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे फर्जीवाड़े और सार्वजनिक संपत्ति के दोहन में तात्कालिक जनप्रतिनिधि व सभापति श्री कृष्णा चंद्राकर की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का सीधा दुरुपयोग करते हुए शासकीय भूमि का अवैध हस्तांतरण कराया और वहां निजी अस्पताल के संचालन को शह दी।
पद का दुरुपयोग और नियमों की धज्जियां
स्थानीय लोगों और जानकार सूत्रों के मुताबिक, जिस भूमि पर शासकीय और सार्वजनिक हित का अधिकार होना चाहिए था, उसे रसूखदारों और निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने की नीयत से कब्जा कराया गया। तात्कालिक सभापति कृष्णा चंद्राकर ने अपने संवैधानिक पद की गरिमा और जन-अधिकारों को ताक पर रखकर इस पूरी भूमि के अनधिकृत हस्तांतरण में मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई।
संदिग्ध नीलामी प्रक्रिया: ‘किस नियम के तहत हुई नीलामी?’
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात भूमि के कथित आवंटन और हस्तांतरण को लेकर सामने आ रही है। यदि इस शासकीय भूमि की कोई नीलामी या हस्तांतरण प्रक्रिया दर्शाई जा रही है, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यह नीलामी आखिर किस नियम और कानून के तहत की गई?
प्रक्रिया पर गंभीर सवाल: क्या छत्तीसगढ़ नगर पालिका/नगर निगम अधिनियम के तहत पारदर्शी ई-ऑक्शन (E-Auction), समाचार पत्रों में सार्वजनिक विज्ञप्ति और सक्षम राज्य शासन की पूर्व अनुमति ली गई थी?
नियमों की अनदेखी: नियमों के अनुसार शासकीय भूमि को किसी निजी व्यक्ति या निजी अस्पताल जैसी व्यावसायिक संस्था को सौंपने के लिए कड़ी कानूनी प्रक्रिया और बाजार मूल्य (गाइडलाइन दर) का पालन अनिवार्य होता है। परंतु इस मामले में सारे नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए अंदरूनी सेटिंग और पद के प्रभाव से कागजी खानापूर्ति करने का गंभीर आरोप लग रहा है।
बिना लाइसेंस संचालित हो रहा अस्पताल: प्रशासनिक मिलीभगत का जीता-जागता प्रमाण
मामला सिर्फ शासकीय भूमि पर कब्जे या संदिग्ध नीलामी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उस अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन पर बिना वैध लाइसेंस के एक निजी अस्पताल धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बिना रजिस्ट्रेशन व एनओसी के अस्पताल चलना यह स्पष्ट करता है कि इस पूरे खेल में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों की सीधी मिलीभगत और शह शामिल है। सवाल यह उठता है कि आम आदमी के छोटे-छोटे मकानों पर बुलडोजर का डर दिखाने वाला प्रशासन, इतने बड़े अवैध अस्पताल संचालन पर आंखें मूंदकर क्यों बैठा रहा?
नगर निगम की कार्यप्रणाली कटघरे में: आयुक्त का गोलमोल रवैया
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यशैली और पारदर्शिता की पूरी तरह पोल खोलकर रख दी है। जब इस अत्यंत संवेदनशील और शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग के मुद्दे पर नगर निगम आयुक्त से जवाब माँगा गया, तो उनका रवैया पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना और गोलमोल रहा।
आयुक्त द्वारा नीलामी के नियमों और हस्तांतरण की वैधता पर सीधा और स्पष्ट जवाब न देकर मामले को घुमाने का प्रयास करना, उनकी अपनी कार्यशैली और मंशा पर भी गहरे सवाल खड़े करता है। अधिकारियों का यह टालमटोल भरा रवैया इस आशंका को और बल देता है कि निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी जमी हुई हैं।
जन-आक्रोश और निष्पक्ष जांच की मांग
शासकीय संपत्ति को निजी लाभ के लिए कौड़ियों के दाम में बेचे जाने और स्वास्थ्य सेवा के नाम पर बिना लाइसेंस के चलाए जा रहे इस अवैध कारोबार से भिलाई-3 के नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। शहरवासियों और जागरूक प्रतिनिधियों ने मांग की है कि:
खसरा नंबर 381/1 से 381/6 तक की भूमि और उसकी पूरी नीलामी/आवंटन प्रक्रिया की तत्काल उच्चस्तरीय (एसडीएम/कलेक्टर स्तरीय) जांच कराई जाए।
यह स्पष्ट सार्वजनिक किया जाए कि नीलामी किस नियम व शासन के किस आदेश के तहत संपन्न हुई।
पद का दुरुपयोग करने वाले तात्कालिक सभापति कृष्णा चंद्राकर और इसमें संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
अवैध रूप से संचालित अस्पताल को तत्काल सील कर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार और अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों की इस कथित मिलीभगत पर क्या कठोर कदम उठाता है या फिर यह फाइल भी गोलमोल जवाबों की बलि चढ़ जाएगी।
