बारिश के बीच हो रहा सड़क मरम्मत कार्य
गुणवत्ता पर उठे सवाल

बारिश के बीच हो रहा सड़क मरम्मत कार्य, गुणवत्ता पर उठे सवाल!!
सुमित (जिला संवाददाता, कांकेर)
भारी वाहनों से क्षतिग्रस्त परलकोट की लाइफलाइन सड़क पर चल रहा मेंटेनेंस, स्थानीय लोगों ने की निगरानी और गुणवत्ता जांच की मांग
पखांजूर। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से क्षतिग्रस्त हुई परलकोट क्षेत्र की लाइफलाइन सड़क की मरम्मत का कार्य इन दिनों कराया जा रहा है। हालांकि, मरम्मत शुरू होने के साथ ही इसकी गुणवत्ता और कार्य की निगरानी को लेकर स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर बारिश के दौरान तथा गीली और कीचड़युक्त सतह पर ही डामरीकरण का कार्य किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क की सतह को उचित तरीके से तैयार किए बिना केवल गड्ढों को भरकर डामर बिछा दिया गया, तो भारी वाहनों के दबाव में यह मरम्मत लंबे समय तक टिक पाना मुश्किल होगा।
सिर्फ गड्ढे भरने से नहीं, टिकाऊ मरम्मत की जरूरत
परलकोट की यह सड़क क्षेत्र के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क पर लगातार दबाव बना रहता है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत कार्य में सिर्फ गड्ढों को ढंकने के बजाय सड़क की वास्तविक मजबूती और जल निकासी जैसी परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य में निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण और सामग्री की जांच महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि मौजूदा मरम्मत कार्य के दौरान इन मानकों की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।
PWD की निगरानी पर भी सवाल
स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल PWD की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। लोगों का कहना है कि जब सड़क पर मरम्मत का कार्य चल रहा है, तो मौके पर गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है? इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हो रही है और क्या मरम्मत कार्य की मजबूती को लेकर कोई निरीक्षण या रिपोर्ट तैयार की जा रही है?
लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर चल रहे कार्य का निरीक्षण करे और यह सुनिश्चित करे कि सड़क की मरम्मत निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें केवल चमकता हुआ नया डामर नहीं, बल्कि ऐसी सड़क चाहिए जो बारिश और भारी वाहनों के दबाव को लंबे समय तक सह सके। यदि मरम्मत के कुछ ही समय बाद सड़क दोबारा उखड़ती है, तो सवाल केवल सड़क को नुकसान पहुंचाने वाले भारी वाहनों पर नहीं, बल्कि मरम्मत की गुणवत्ता और उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी उठेंगे।


