*भिलाई-चरौदा नगर निगम में एक और राजस्व घोटाला*
*बिना नीलामी के बजरंग पारा में दुकानें संचालित* *अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल*
*भिलाई-चरौदा नगर निगम में एक और राजस्व घोटाला*
*बिना नीलामी के बजरंग पारा में दुकानें संचालित*
*अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल*
*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव*
भिलाई-चरौदा नगर निगम क्षेत्र में राजस्व विभाग की मनमानी और घपले-घोटालों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। निगम की जमीनों और संपत्तियों पर अवैध कब्जे का एक और ताजा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला भिलाई-3 के बजरंग पारा स्थित खसरा नंबर 383/1 और भूखंड क्रमांक 42 से जुड़ा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर सरेआम सरकारी संपत्ति पर कब्जा जमाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बजरंग पारा भिलाई-3 स्थित खसरा नंबर 383/1 के अंतर्गत भूखंड क्रमांक 42 पर कुल तीन प्लॉट हैं, जिनमें प्रत्येक प्लॉट का आकार 660 वर्ग फीट है। हैरानी की बात यह है कि ये प्लॉट अभी तक निगम की आधिकारिक नीलामी प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किए गए हैं। इसके बावजूद इन बेशकीमती जमीनों पर धड़ल्ले से कब्जा कर लिया गया है और मौके पर दुकानें संचालित की जा रही हैं।
बिना किसी वैध आवंटन और नीलामी के इस तरह का व्यावसायिक संचालन यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर अवैध कब्जों को खुला संरक्षण मिल रहा है।
राजस्व अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका और धोखाधड़ी के आरोप
नगर निगम में राजस्व से जुड़े मामलों में धांधली और भ्रष्टाचार का यह कोई पहला मामला नहीं है। स्थानीय नागरिकों और जानकारों का आरोप है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इस तरह सरकारी जमीन पर रातों-रात कब्जे होना और दुकानें सज जाना असंभव है।
विशेष रूप से, इस विभाग के प्रभारी राजू वर्मा की कार्यशैली और स्थितियां ऐसे मामलों में हमेशा से संदिग्ध रही हैं। पूर्व में भी उनके कार्यकाल के दौरान राजस्व विभाग की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बिना नीलामी प्रक्रिया के संपत्तियों का इस तरह उपयोग किया जाना सीधे तौर पर आम जनता और नगर निगम के राजस्व के साथ खुली धोखाधड़ी है।
आगे क्या?
निगम की इस अमूल्य संपत्ति के दुरुपयोग और राजस्व को लग रहे भारी चूने ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या उच्च अधिकारियों या शासन स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी, या फिर हमेशा की तरह फाइलें दबा दी जाएंगी?


