भूमाफिया और प्रशासनिक सांठगांठ का खेल:
बिना नीलामी के 40 से अधिक भूखंडों पर अवैध कब्जा, जिम्मेदार मौन!
*भूमाफिया और प्रशासनिक सांठगांठ का खेल: बिना नीलामी के 40 से अधिक भूखंडों पर अवैध कब्जा, जिम्मेदार मौन!*
*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव*
शहर के नगर निगम और जिला प्रशासन की बड़ी लापरवाही और मिलीभगत का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। कृष्णा चंद्राकर की जमीन के विवाद का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब दर्जनों भूखंडों पर सुनियोजित तरीके से अवैध कब्जे का बड़ा खेल उजागर हुआ है। प्रशासनिक अमला इस पूरे घोटाले पर आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि निगम द्वारा जिन भूखंडों की नीलामी की प्रक्रिया ही पूरी नहीं की गई है, उन पर नियम-कानूनों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध कब्जे जमाए जा रहे हैं।
भूखंड क्रमांक 383/1 बना अवैध कब्जे का सबसे बड़ा उदाहरण
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भूखंड क्रमांक 383/1 इसका जीता-जागता प्रमाण है। इस एक ही भूखंड को तीन अलग-अलग हिस्सों (प्लॉट) में बांटकर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। बिना किसी वैध आवंटन, नीलामी या कानूनी प्रक्रिया के इन जमीनों पर निर्माण और दखल बढ़ता जा रहा है, लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं।
राजस्व अधिकारी की भूमिका पर सीधे आरोप: लोगों में भारी आक्रोश
लोगों का साफ कहना है कि सबसे ज्यादा जमीन के घोटाले राजस्व अधिकारी द्वारा ही किए जा रहे हैं।
राजस्व अधिकारी राजू वर्मा और आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत की कार्यशैली पर अब शहरभर में सवालिया निशान लगने लगे हैं।
जब बिना नीलामी के सार्वजनिक और निगम की संपत्तियों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं, तब राजस्व अमला और निगम प्रशासन क्या कर रहा है?
क्षेत्र में अकेले ऐसे 40 से अधिक भूखंड चिन्हित किए जा चुके हैं, जिनकी आज तक निगम द्वारा कोई नीलामी प्रक्रिया नहीं हुई है, इसके बावजूद उन पर भूमाफियाओं और अवैध कब्जाधारियों का राज कायम है।
कलेक्टर की भूमिका भी हुई संदिग्ध
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि इतना बड़ा गोलमाल और प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, इसके बावजूद जिला कलेक्टर महोदय की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई न होना उनकी भूमिका को भी संदिग्ध बनाता है। जनता के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कब्जा गिरोह फल-फूल रहा है, जो शासन और प्रशासन दोनों को ठेंगा दिखा रहा है।
अब आगे क्या?
क्या जिला प्रशासन और नगर निगम नींद से जागेगा और इन 40 से अधिक भूखंडों को अवैध कब्जाधारियों के चंगुल से मुक्त कराएगा? या फिर यूं ही फाइलों में लीपापोती कर भूमाफियाओं को संरक्षण दिया जाता रहेगा? जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में कोई उच्चस्तरीय जांच बैठकर दोषियों पर गाज गिरेगी या यह मामला भी फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा।
नोट: यदि समय रहते इन अवैध कब्जों पर बुलडोजर नहीं चलाया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

