*राजनांदगांव पुलिस की ‘सफलता’ या सवालों के घेरे में प्रेस विज्ञप्ति?
गणेश विसर्जन के दौरान गुम चांदी के कड़े की वापसी पर उठ रहे गंभीर सवाल*
*राजनांदगांव पुलिस की ‘सफलता’ या सवालों के घेरे में प्रेस विज्ञप्ति? गणेश विसर्जन के दौरान गुम चांदी के कड़े की वापसी पर उठ रहे गंभीर सवाल*
संवाददाता गिरधारी सावरकर ।
राजनांदगांव 1 अक्टूबर 26
जिले में गणेश विसर्जन झांकी के दौरान राजनांदगांव पुलिस ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए प्रार्थी योगेश साहू को उनका गुम हुआ लगभग 30,000 रुपये कीमत का चांदी का कड़ा वापस लौटा दिया है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से प्रार्थी के चेहरे पर तो मुस्कान लौट आई है और उन्होंने पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा सहित पूरी पुलिस टीम का आभार भी जताया है, लेकिन इस मामले में जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति ने कई अनकहे और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञप्ति में छिपे वे सवाल, जिनके जवाब गायब हैं:
*कड़ा कहां और किस हाल में मिला?*
प्रेस विज्ञप्ति में इस बात का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि गुम हुआ वह चांदी का कड़ा आखिर पुलिस को कहां से और किस स्थिति में बरामद हुआ। क्या यह किसी सड़क पर लावारिस हालत में मिला या किसी तलाशी अभियान के दौरान जब्त किया गया?
*ईमानदार नागरिक का जिक्र क्यों नहीं?*
यदि यह कीमती कड़ा किसी सज्जन या ईमानदार नागरिक को सड़क पर या मेले में पड़ा मिला और उसने इसे थाने में लाकर जमा किया, तो उस व्यक्ति की ईमानदारी को इस विज्ञप्ति में स्थान क्यों नहीं दिया गया? उसकी सराहना करना पुलिस का फर्ज बनता था।
*क्या किसी चोर पर हुई कानूनी कार्रवाई?*
यदि इस कड़े को किसी संदिग्ध या चोर से बरामद किया गया है, तो क्या उस आरोपी की गिरफ्तारी हुई और उस पर क्या कानूनी कार्रवाई की गई? इस संबंध में विज्ञप्ति पूरी तरह खामोश है।
*क्या वाकई कड़ा ‘गुम’ हुआ था या उतरवाया गया था?*
शहर में चर्चा यह भी है कि गणेश विसर्जन की रात सुरक्षा और चेकिंग के नाम पर पुलिस द्वारा कई लोगों के हाथों से जबरन कड़े या जेवर उतरवाए गए थे। ऐसे में क्या यह वही कड़ा है, जिसे उतरवाने के बाद प्रार्थी को थाने के अनगिनत चक्कर काटने पड़े और पक्के बिल दिखाने के बाद ही उसे उसका सामान वापस मिल पाया?
राजनांदगांव पुलिस ने प्रार्थी को उनका कीमती सामान वापस दिलाकर राहत जरूर दी है, लेकिन एक जिम्मेदार और पारदर्शी पुलिसिंग की मांग है कि इस तरह की विज्ञप्तियों में सिर्फ ‘सफलता’ का ढिंढोरा पीटने के बजाय पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाए। आखिर कड़ा कहां से और कैसे मिला, इस पर से पर्दा उठना बेहद जरूरी है, ताकि जनता के मन में किसी भी प्रकार का संशय न रहे।

