शहर में साल 2016 में हुई गोलीकांड में 09 वर्ष बाद आया फैसलाघनश्याम विश्वकर्मा को मारी थी गोली नितीन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली, दिनेश माहेश्वरी उर्फ गोलू मारवाडी एवं भरत साहू को उम्रकैद (सश्रम) की सजा!!
न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद उपरोक्तानुसार आदेश पारित किया गया है।

शहर में साल 2016 में हुई गोलीकांड में 09 वर्ष बाद आया फैसलाघनश्याम विश्वकर्मा को मारी थी गोली नितीन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली, दिनेश माहेश्वरी उर्फ गोलू मारवाडी एवं भरत साहू को उम्रकैद (सश्रम) की सजा!!
शेखर ठाकुर (छत्तीसगढ़)
राजनांदगाँव ‘श्रीमती ज्योति अग्रवाल मैडम’ द्वारा गोली मारकर हत्या करने के प्रयास के मामले में आज दिनाँक 28 सितम्बर 2026 को फैसला सुनाते हुये अभियुक्तगण के विरुद्ध घनश्याम विश्वकर्मा के ऊपर गोली मारकर हत्या की कोशिश करने का आरोप साबित पाये जाने पर अभियुक्त नितीन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली पिता निर्मल कुमार लिम्बो, उम्र 40 वर्ष, निवासी वार्ड नं. 44 गौरीनगर, थाना कोतवाली राजनांदगांव को भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34 के तहत् आजीवन कारावास (सश्रम) एवं पांच हजार रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में तीन माह का सश्रम कारावास, घारा 120 बी/34 भारतीय दंड संहिता के तहत् आजीवन कारावास (सश्रम) एवं पांच हजार रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में तीन माह का सश्रम कारावास, धारा 25 (1-बी) ए. आयुध अधिनियम के तहत् एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं पांच सौ रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में 01 माह का सश्रम कारावास तथा धारा 27 आयुध अधिनियम के तहत् 07 वर्ष का सश्रम कारावास एवं पांच सौ रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में एक माह का सश्रम कारावास, अभियुक्त दिनेश कुमार माहेश्वरी उर्फ गोलू मारवाड़ी पिता स्व. जगदीश माहेश्वरी, उम्र 43 वर्ष, निवास किलापारा, राजनांदगांव को भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34 के तहत् आजीवन कारावास (सश्रम) एवं पांच हजार रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में तीन माह का सश्रम कारावास, धारा 120 बी/34 भारतीय दंड संहिता के तहत् आजीवन कारावास (सश्रम) एवं पांच हजार रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में तीन माह का सश्रम कारावास एवं अभियुक्त भरत साहू पिता स्व. गोपाल साहू, उम्र 53 वर्ष, निवासी वार्ड नं. 43, बसंतपुर, राजनांदगांव को भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34 के तहत् आजीवन कारावास (सश्रम) एवं पांच हजार रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशिअदा न किये जाने की स्थिति में तीन माह का सश्रम कारावास, धारा 120 बी/34 भारतीय दंड संहिता के तहत् आजीवन कारावास (सश्रम) एवं पांच हजार रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में तीन माह का सश्रम कारावास की सजा से दण्डित किये जाने का दण्डादेश पारित किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा प्रकरण के एक अन्य आरोपी विनोद यादव के विरूद्ध आरोप साबित न पाये जाने के कारण उसे दोषमुक्त किया गया है।मामले में छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से पैरवी करने वाले जिला लोक अभियोजक श्री राजेश खांडेकर एवं अतिरिक्त लोक अभियोजक श्री विनोद कुमार बाजपेयी ने घटना की जानकारी देते हुये बताया कि, दिनाँक 21 नवम्बर 2016 को आहत घनश्याम विश्वकर्मा दोपहर 4.15 बजे अपने साथी दीपक राजूपत के साथ कोर्ट पेशी निपटा कर मोटर सायकल से वापस आ रहा था तभी इंदिरा नगर चौक के पास आरोपी नितिन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली अपने साथी गोलू मारवाड़ी एवं भरत साहू के साथ वहाँ आया और सभी एक राय होकर मुंकू नेपाली ने हत्या करने की नियत से देशी कट्टा से घनश्याम विश्वकर्मा के ऊपर गोली चलाया जिससे घनश्याम विश्वकर्मा के दाहिने कन्धा के पीछे गोली लगने वे वह घायल हो गया, जिसे उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपीगण मुंकू नेपाली व गोलू मारवाड़ी फरार हो गये और शास्त्री नगर चौंक कैम्प-1, भिलाई जिला दुर्ग (छ.ग.) निवासी विनोद यादव पिता कपिल देव यादव, उम्र 45 वर्ष के घर में छिपे थे। आरोपी विनोद यादव द्वारा संपूर्ण जानकारी के बाद भी कि, आरोपीगण मुंकू नेपाली व गोलू कारवाड़ी ने गंभीर अपराध किया है, दोनों को अपने घर में छिपाकर रखा था। घटना की रिपोर्ट आहत घनश्याम विश्वकर्मा के भाई संतोष विश्वकर्मा के द्वारा थाना बसंतपुर में दिनांक 21.11.2016 को की गई थी। उक्त रिपोर्ट के आधार पर थाना बसंतपुर द्वारा मामला पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया था। विवेचना के दौरान आरोपीगणों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेजा गया था तथा घटना में प्रयुक्त समस्त सामग्री कार, वाहन, देशी कट्टा आदि की जप्ती की कार्यवाही की गई थी तथा थाना बसंतपुर द्वारा प्रकरण के सम्पूर्ण विवेचना उपरान्त भारतीय दण्ड विधान की धारा 307, 120-बी, 212, 34 तथा धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत् अभियोग पत्र विचारण हेतु न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था। न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद उपरोक्तानुसार आदेश पारित किया गया है।
