मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी का खेल? एनएमएमएस प्रणाली की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल*
मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी का खेल? एनएमएमएस प्रणाली की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल*

*मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी का खेल? एनएमएमएस प्रणाली की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल*

तिलक राम पटेल महासमुंद ब्यूरोचिफ भारत संवाद टीवी न्यूज चैनल दैनिक अपडेट पेपर
जनपद पंचायत सरायपाली अंतर्गत संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के विभिन्न कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने तथा फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के उद्देश्य से शासन द्वारा एनएमएमएस (National Mobile Monitoring System-NMMS) एप के माध्यम से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत कार्यस्थल पर उपस्थित मजदूरों का फोटो एवं उपस्थिति निर्धारित समय पर दर्ज की जाती है, जिससे वास्तविक मजदूरों को ही मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
किन्तु सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ कार्यस्थलों पर एनएमएमएस व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत कार्य किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि वास्तविक मजदूर पूरे दिन कार्य करने के बाद जब कार्यस्थल से अपने घर लौट जाते हैं, तब उनकी अनुपस्थिति में कुछ अन्य व्यक्तियों को मजदूर बताकर उनकी उपस्थिति दर्ज करने का खेल खेला जा रहा है। यदि यह आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह न केवल मनरेगा की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न है, बल्कि शासन की भ्रष्टाचार रोकने की मंशा के भी विपरीत माना जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि कार्यस्थलों पर वास्तविक मजदूरों के स्थान पर फर्जी उपस्थिति दर्ज की जाती है तो इससे योजना की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। साथ ही कार्य की गुणवत्ता, मजदूरों की वास्तविक संख्या एवं भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
जानकारों के अनुसार एनएमएमएस प्रणाली इसलिए लागू की गई थी ताकि कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों का वास्तविक सत्यापन हो सके और फर्जी मस्टर रोल, काल्पनिक मजदूर तथा अनियमित भुगतान जैसी शिकायतों पर रोक लगाई जा सके। ऐसे में यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों एवं जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभागीय अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक एवं जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी समय-समय पर औचक निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान कार्यस्थल पर उपस्थित मजदूरों की संख्या, एनएमएमएस में दर्ज उपस्थिति, कार्य की प्रगति तथा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
यदि कार्यस्थलों पर नियमित निरीक्षण एवं सत्यापन की व्यवस्था सुदृढ़ की जाती है तो मनरेगा योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी, वास्तविक श्रमिकों को उनका हक मिलेगा तथा शासन की जनहितकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र व्यक्तियों तक पहुंच सकेगा।



