
भैयाथान। भैयाथान विकासखंड अंतर्गत बसदेई विद्युत उपकेंद्र की बिजली व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मानसून की पहली ही बारिश ने बिजली विभाग की तैयारियों की पोल खोल दी। मंगलवार शाम करीब 4 बजे से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई, लेकिन 15 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो सकी, जिससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का आरोप है कि छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की कार्यप्रणाली वर्षों से लचर बनी हुई है। गर्मी के मौसम में रोजाना कई-कई घंटे बिजली कटौती आम बात है। कई बार प्रतिदिन 3 से 4 घंटे तक बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बंद रहती है। वहीं सप्ताह या पंद्रह दिन में एक बार “मेंटेनेंस” के नाम पर घंटों बिजली काट दी जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि त्योहारों से पहले, बच्चों की परीक्षाओं के दौरान और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर भी मेंटेनेंस का हवाला देकर बिजली आपूर्ति बाधित कर दी जाती है, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके बिजली व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार देखने को नहीं मिलता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मानसून की पहली ही बारिश में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाए, तो आने वाले दिनों में लगातार बारिश के दौरान हालात कैसे संभाले जाएंगे? विभाग हर वर्ष मानसून पूर्व रखरखाव और तैयारियों का दावा करता है, लेकिन पहली ही बारिश ने इन दावों की हकीकत उजागर कर दी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद न तो समय पर समाधान होता है और न ही अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब देते हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
बसदेई विद्युत उपकेंद्र की बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए।
15 घंटे से अधिक समय तक बिजली बंद रहने की जिम्मेदारी तय कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
मानसून के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
बार-बार होने वाली अघोषित बिजली कटौती और मेंटेनेंस के नाम पर होने वाली परेशानी पर रोक लगाई जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक बसदेई क्षेत्र के ग्रामीण बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतते रहेंगे? यदि पहली बारिश में ही व्यवस्था जवाब दे दे, तो इसे विभाग की तैयारी माना जाए या घोर लापरवाही? ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान और जवाबदेही चाहते हैं।

