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अजीब घोटाला

7 साल बाद कोर्ट के नोटिस से खुला 'कागजी सप्लाई' का खेल, 3.5 करोड़ डकारने की साजिश।* 

*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव* 

*अजीब घोटाला: 7 साल बाद कोर्ट के नोटिस से खुला ‘कागजी सप्लाई’ का खेल, 3.5 करोड़ डकारने की साजिश।*

 

स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और घोटालों की एक ऐसी अनोखी परत खुली है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख दिया है। यह एक ऐसा ‘अजीब घोटाला’ है जहां सरकारी फाइलों और कागजों में तो लाखों ‘जननी किट’ (गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक सामग्री) की सप्लाई दिखा दी गई, लेकिन जब जमीनी हकीकत देखी गई तो स्वास्थ्य विभाग के स्टोर में एक भी पैकेट नहीं मिला।

साजिश का यह पूरा खेल करीब 7 साल बाद तब उजागर हुआ, जब एक कोर्ट नोटिस विभाग के पास पहुंचा। इस नोटिस के बाद जब आनन-फानन में जांच शुरू हुई, तो साढ़े तीन करोड़ रुपये (₹3.5 करोड़) के फर्जी भुगतान का यह बड़ा नेटवर्क सामने आ गया।

2019 में बजट मंजूर, 2023 में ‘फर्जी’ रिसीविंग

मामले की जड़ें साल 2019 से जुड़ी हैं, जब जननी किट की खरीदी के लिए सरकार द्वारा बजट मंजूर किया गया था। कागजी जालसाजों ने इस घोटाले को इतनी फुर्सत और शातिर तरीके से अंजाम दिया कि साल 2023 में जाकर स्टोर कीपर से सामग्री की बकायदा रिसीविंग (पावती) भी करा ली गई। यानी कागजों पर माल गोदाम में आ चुका था और उसके बदले ₹3.5 करोड़ के भुगतान का दावा भी ठोक दिया गया।

जांच में खुली पोल: स्टोर में ‘शून्य’ पैकेट

जब कोर्ट के नोटिस के बाद उच्च अधिकारियों ने स्टोर का औचक निरीक्षण और स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया, तो अधिकारी दंग रह गए। जिस किट के नाम पर करोड़ों रुपये का बिल पास कराने की तैयारी थी, उसका एक सिंगल पैकेट भी स्टोर में मौजूद नहीं था। पूरा का पूरा खेल सिर्फ ‘कागजी सप्लाई’ तक सीमित था।

पुलिस जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क, खुलेंगी कई परतें

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पुलिस ने इस पूरे नेक्सस (नेटवर्क) की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि इसमें स्वास्थ्य विभाग के अंदर बैठे सफेदपोश अधिकारी, चालाक स्टोर कीपर और ठेकेदार/सप्लायर की मिलीभगत है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक:

डिजिटल और मैन्युअल रिकॉर्ड जब्त: विभाग के पिछले 5 साल के स्टॉक रजिस्टर और डिजिटल एंट्रीज को सील कर दिया गया है।

सप्लायर रडार पर: जिस कंपनी या फर्म के नाम पर यह कागजी सप्लाई दिखाई गई, उसके बैंक खातों और टेंडर दस्तावेजों की स्क्रूटनी की जा रही है।

कई बड़े चेहरों पर लटकी तलवार: आने वाले दिनों में विभागीय अफसरों और तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ होगी, जिससे कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।

गरीब गर्भवती महिलाओं के हक पर डाका डालने वाले इस ‘कागजी घोटाले’ ने यह साबित कर दिया है कि सिस्टम में बैठे कुछ लोग किस कदर संवेदनहीन हो चुके हैं। अब देखना यह है कि पुलिस की इस कार्रवाई में इस घोटाले का असली ‘मास्टरमाइंड’ कब तक सलाखों के पीछे पहुंचता है।

शेखर ठाकुर संपादक

शेखर ठाकुर वर्तमान में भारत संवाद न्यूज़ चैनल और दैनिक संवाद अपडेट समाचार पत्र में छत्तीसगढ़ संपादक के रूप कार्यभार संभाल रहे हैं। पत्रकारिता के प्रति अपने समर्पण और स्थानीय मुद्दों पर गहरी पकड़ के लिए पहचाने जाने वाले शेखर, छत्तीसगढ़ की हर छोटी-बड़ी खबर को प्रमाणिकता के साथ जनता और प्रशासन तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

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