*करोड़ों का खेल! अधूरे निर्माण
एडवांस भुगतान और फर्जी नियुक्तियों ने खोली विभाग की पोल,कलेक्टर बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई*

*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव*
*करोड़ों का खेल! अधूरे निर्माण, एडवांस भुगतान और फर्जी नियुक्तियों ने खोली विभाग की पोल,कलेक्टर बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई*
गरियाबंद जिले में आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सरकारी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई विकास कार्य अधूरे हैं। कहीं निर्माण एजेंसियां एडवांस भुगतान लेने के बाद काम छोड़ गईं तो कहीं नियमों से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी गई। अब इन मामलों में जिला प्रशासन रिकवरी और जांच की कार्रवाई कर रहा है।
पहली गड़बड़ी: करोड़ों का भुगतान, लेकिन स्कूलों का काम अधूरा
स्कूल जतन योजना के तहत कई स्कूलों के निर्माण और मरम्मत कार्य पूरे नहीं हो सके। विभाग ने कुछ एजेंसियों को अग्रिम भुगतान कर दिया, लेकिन काम समय पर पूरा नहीं हुआ। अब करीब 2.88 करोड़ रुपये की रिकवरी की तैयारी की जा रही है। संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
दूसरी गड़बड़ी: शौचालय योजना में भी लापरवाही
116 स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण एजेंसी को बड़ी राशि अग्रिम देने के बावजूद करीब 10 महीने में सिर्फ 23 शौचालय ही बन पाए। प्रशासन ने अधूरे कार्यों पर आपत्ति जताते हुए राशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
तीसरी गड़बड़ी: स्वीकृत पद 255, नियुक्ति 513
आश्रम-शालाओं में स्वीकृत पदों से कहीं अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने से विभाग पर आर्थिक बोझ बढ़ गया। शासन से पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों का करीब 3.84 करोड़ रुपये वेतन लंबित हो गया। अतिरिक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त होने के बाद भी वे लगातार भुगतान की मांग कर रहे हैं।
कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने माना कि कई मामलों में अनियमितताएं सामने आई हैं। उनके अनुसार सभी कार्यों का सत्यापन कराया गया है। जिन एजेंसियों ने काम अधूरा छोड़ा है, उनसे रिकवरी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी होगी। पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
