दुखद समाचार: भिलाई नगर निगम के 5 बार के निर्दलीय पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्रा का निधन,
शहर में शोक की लहर*

*दुखद समाचार: भिलाई नगर निगम के 5 बार के निर्दलीय पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्रा का निधन, शहर में शोक की लहर*
*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव*
भिलाई। भिलाई नगर निगम के राजनीति के मजबूत स्तंभ और 5 बार के लोकप्रिय निर्दलीय पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्रा का आज दोपहर 12:00 बजे दुखद निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे भिलाई शहर और निगम प्रशासन में शोक की लहर दौड़ गई है। वशिष्ठ नारायण मिश्रा न केवल एक जनप्रिय जनप्रतिनिधि थे, बल्कि जनता के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहने वाले एक जमीनी नेता थे।
निर्दलीय रहकर जीता जनता का अटूट विश्वास
बिना किसी राजनीतिक दल के बैनर के लगातार 5 बार पार्षद चुनकर आना वशिष्ठ नारायण मिश्रा की जनसेवा और उनके प्रति जनता के असीम प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण है। सादगी, निर्भीकता और आम जनता के मुद्दों को निगम सदन में मजबूती से उठाने की उनकी शैली ने उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर उठाकर एक अलग पहचान दी।
भिलाई के लिए अपूरणीय क्षति
उनका जाना भिलाई नगर निगम और पूरे शहर के लिए एक अपूरणीय क्षति है। जनसेवा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। शहर के विभिन्न जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
*मेडिकल इमरजेंसी में ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के सबसे बड़े मसीहा**
छत्तीसगढ़ और खासकर भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में जब भी किसी गंभीर मरीज (चाहे वो हार्ट अटैक का पेशेंट हो या क्रिटिकल केयर का) को तुरंत रायपुर के उच्च चिकित्सा केंद्र पहुंचाना होता था, तब वशिष्ठ नारायण मिश्रा का नाम सबसे पहले याद किया जाता था।
वे खुद आगे बढ़कर पुलिस प्रशासन और यातायात विभाग से समन्वय स्थापित करते थे और भिलाई से रायपुर तक का रास्ता सेकंडों में क्लियर करवाकर ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनवाते थे।
कई जिंदगी बचाने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
निर्णायक पहल: चाहे देर रात की बात हो या भारी ट्रैफिक के समय की, वशिष्ठ जी की एक आवाज पर प्रशासन हरकत में आता था और एम्बुलेंस के लिए निर्बाध रास्ता तैयार किया जाता था।
समय से लड़ाई: भिलाई से रायपुर तक का सफर जो आम दिनों में घंटों का होता है, उनके बनाए ग्रीन कॉरिडोर से एम्बुलेंस महज 35-40 मिनट में रायपुर अस्पताल पहुंच जाती थी।
संवेदनशीलता का परिचय: एक नहीं, बल्कि कई बार उन्होंने अपनी निजी सक्रियता से दिल और गंभीर बीमारियों के मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर नई जिंदगी दी।
निर्दलीय पार्षद, लेकिन हर दिल के अजीज
5 बार निर्दलीय चुनाव जीतकर आना इस बात का सबूत है कि उनका दायरा किसी पार्टी का मोहताज नहीं था। जब भी किसी आम नागरिक को आधी रात में भी अस्पताल या एम्बुलेंस के लिए मदद की जरूरत पड़ती, तो वशिष्ठ नारायण मिश्रा बिना देरी किए मोर्चे पर डट जाते थे।
भिलाई की जनता उन्हें केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि आपात स्थिति में मदद के लिए तैयार रहने वाले एक ‘देवदूत’ के रूप में हमेशा याद रखेगी। उनका निधन भिलाई और पूरे दुर्ग-रायपुर अंचल के लिए एक कभी न पूरी होने वाली क्षति है।

