संवाददाता संगीता सिंह की रिपोर्ट। भारत संवाद
*डिजिटल घोटाला: बागरेकसा केंद्र में 1696 क्विंटल धान की अफरा-तफरी, 52.57 लाख रुपए का धान गबन, FIR की तैयारी राजनांदगांव। 6 अक्टूबर 2026*
*ऑनलाइन रिकॉर्ड में था स्टॉक, जमीन पर एक दाना भी नहीं*
राजनांदगांव जिले के बागरेकसा धान खरीदी केंद्र में बड़ा डिजिटल घोटाला सामने आया है। अचानक निरीक्षण में खुली पोल के बाद जांच दल ने सख्त रुख अपनाते हुए 52.57 लाख रुपए मूल्य के 1696.06 क्विंटल धान गबन का मामला पकड़ा है। मामले में दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
*2-2 फर्जी धान खरीदी पर्ची से हुआ खुलासा*
जिले के बागरेकसा केंद्र में 52.57 लाख रुपए के धान की कमी पाई गई। जांच में पता चला कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1,696.06 क्विंटल धान का स्टॉक दिखाया गया था, लेकिन मौके पर भौतिक सत्यापन में एक दाना भी धान नहीं मिला।
जांच दल ने जब ऑनलाइन रिपोर्ट मिलाई तो पाया कि केंद्र प्रभारी और ऑपरेटर ने मिलकर फर्जी एंट्री कर 2-2 बार एक ही किसान के नाम पर धान खरीदी दिखा दी। 1,164,169 बोरी धान में से 65,627.60 क्विंटल धान का कोई अता-पता नहीं है।
*मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की*
सूत्रों के अनुसार घोटाला सामने आने के बाद केंद्र प्रभारी और संबंधित कर्मचारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की। अधिकारियों को गुमराह करने के लिए कहा गया कि “धान सुखत में कम हो गया” और “चूहों ने खा लिया”। लेकिन जांच दल ने जब भंडारण स्थल का निरीक्षण किया तो वहां धान की एक बोरी भी नहीं मिली।
*प्रति बोरा 2 किलो कम की जा रही थी तौलाई*
जांच में यह भी सामने आया कि किसानों की उपज तौलते समय प्रति बोरा 2 किलो धान कम तौला जा रहा था। इस तरह 875 किसानों से कुल 34,430.08 क्विंटल धान में से 29,501.46 क्विंटल धान गायब कर दिया गया। शेष 800 क्विंटल धान की अफरा-तफरी अलग से की गई।
*कलेक्टर ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश*
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। दोषी समिति प्रबंधक, ऑपरेटर और केंद्र प्रभारी के खिलाफ धारा 420, 409 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
साथ ही जिले के सभी 63 धान खरीदी केंद्रों की जांच के आदेश दिए गए हैं। जिन केंद्रों में भी ऑनलाइन और भौतिक स्टॉक में अंतर मिलेगा, वहां के प्रभारियों पर कार्रवाई होगी।
*किसानों में आक्रोश*
इस घोटाले के खुलासे के बाद किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई को समिति के कर्मचारियों ने मिलकर लूट लिया। किसान संगठनों ने दोषियों की संपत्ति कुर्क कर वसूली की मांग की है।
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