*ब्लड डोनेशन के नाम पर ‘सौदा’?
Rajnandgaon समेत प्रदेश भर में खून की कालाबाजारी और दलाली का जाल, दानदाताओं की भावनाओं का शोषण!*
*ब्लड डोनेशन के नाम पर ‘सौदा’? Rajnandgaon समेत प्रदेश भर में खून की कालाबाजारी और दलाली का जाल, दानदाताओं की भावनाओं का शोषण!*
*शेखर ठाकुर राजनांदगांव*
राजनांदगांव।
मानवता की सेवा और किसी मरीज की जिंदगी बचाने के पावन उद्देश्य से किए जाने वाले ‘रक्तदान’ को अब कुछ स्वार्थी तत्वों और मुनाफाखोरों ने धंधा बना लिया है। संस्कारधानी राजनांदगांव जिले सहित प्रदेश के कई अन्य जिलों में खून की कालाबाजारी और संगठित दलाली का एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आ रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शहर के कुछ तथाकथित समाज सेवी और रक्तदानी संगठन रक्तदान शिविरों के नाम पर बड़ा खेल खेल रहे हैं। ये तत्व विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर बड़े-बड़े रक्तदान शिविर (Blood Donation Camps) आयोजित करते हैं और आम नागरिकों व युवाओं को आकर्षित करने के लिए महंगे और लुभावने गिफ्ट बांटते हैं। लेकिन इस सेवा-भाव की आड़ में जो सच छुपा है, वह बेहद खौफनाक और शर्मनाक है।
स्थानीय ब्लड बैंकों को दरकिनार कर दूसरे जिलों में भेजा जा रहा खून
मिली जानकारी के मुताबिक, शिविरों में एकत्रित किए गए रक्त को स्थानीय स्तर पर सरकारी या अधिकृत अस्पतालों में देने के बजाय, दूसरे जिलों और बाहरी प्राइवेट ब्लड बैंकों को ऊंचे दामों और साठगांठ के तहत सौंपा जा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब बाहरी जिलों की ब्लड बैंक टीमें बिना किसी स्थानीय प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शी निगरानी के, चोरी-छिपे आकर इन शिविरों का संचालन करती हैं और एकत्रित ब्लड यूनिट्स को रातों-रात बाहर ले जाती हैं।
दानदाता की भावना और मरीज की मजबूरी का ‘सौदा’
यह न केवल उन निस्वार्थ दानदाताओं की भावनाओं के साथ सीधा विश्वासघात है जो केवल किसी अनमोल जीवन को बचाने की उम्मीद में अपना खून दान करते हैं, बल्कि उन स्थानीय गरीब मरीजों के मुंह से निवाला छीनने जैसा है जो जरूरत के वक्त एक-एक यूनिट ब्लड के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होते हैं। जब राजनांदगांव या आसपास के अस्पतालों में किसी दुर्घटनाग्रस्त या गंभीर मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है, तो उन्हें ‘स्टॉक खाली’ होने का बहाना बना दिया जाता है, जबकि दूसरी ओर यही खून कालाबाजारी के जरिये दूसरे जिलों में मोटी रकम के एवज में खपाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की खामोशी पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे गोरखधंधे ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं:
बाहरी जिलों से आकर बिना सख्त जांच-परख के रक्तदान शिविर आयोजित करने की इजाजत कैसे दी जा रही है?
क्या जिला स्वास्थ्य विभाग को इस बात की खबर नहीं है कि शहर से कितनी ब्लड यूनिट्स बाहर भेजी जा रही हैं?
उपहारों का लालच देकर खून जुटाने और उसकी खरीद-फरोख्त करने वाले इन दलालों पर अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कड़ी कार्रवाई की मांग
संस्कारधानी की जनता और जागरूक नागरिकों ने अब इस खून के खेल के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन तुरंत संज्ञान लेते हुए बाहरी ब्लड बैंकों की टीमों और ऐसे कथित समाज सेवियों की निष्पक्ष जांच करे। रक्तदान के नाम पर चल रही इस कालाबाजारी और दलाली के सिंडिकेट को तुरंत ध्वस्त किया जाए और दोषियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज कर जेल भेजा जाए, ताकि मानवता का यह सबसे पवित्र कार्य व्यापार न बनने पाए।


