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466 किलो धावड़ा गोंद जब्ती पर सवालों का साया, वन विभाग के बयान में विरोधाभास

शलभ गौरानी
शलभ गौरानी

कांटाफोड़ क्षेत्र में वन विभाग द्वारा 466 किलोग्राम अवैध धावड़ा गोंद जब्त करने की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर विभाग ने प्रेस नोट जारी कर एक ही आरोपी के खिलाफ कार्रवाई बताई है, वहीं दूसरी ओर विभाग के ही कर्मचारियों के अलग-अलग बयान सामने आने से पूरे मामले पर संदेह गहरा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमान मुख्य वन संरक्षक उज्जैन एवं वन मंडल अधिकारी देवास के निर्देशन तथा उपवन मंडल अधिकारी कन्नौद के मार्गदर्शन में 25 मार्च 2026 की रात परिक्षेत्र अधिकारी विधि सिरोलिया के आदेश पर टीम ने कांटाफोड़-चंद्रकेशर बांध मार्ग स्थित नवोदय विद्यालय के पुराने गेट के पास बोलेरो पिकअप (MP09GG5605) को रोककर तलाशी ली। वाहन से 466 किलोग्राम धावड़ा गोंद बरामद किया गया।
वन विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट में केवल गंगा प्रसाद पिता राधेश्याम को आरोपी बताते हुए उसके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
लेकिन बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब मौके पर मौजूद बीटगार्ड द्वारा दो आरोपियों की बात कही गई, जबकि आधिकारिक दस्तावेज में केवल एक ही नाम दर्ज किया गया है। इस विरोधाभास ने पूरे मामले की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
जब इस संबंध में परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) विधि सिरोलिया से बात की गई, तो उनका कहना था कि “मामले की जांच जारी है, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।” हालांकि यह जवाब भी कई सवाल छोड़ जाता है कि यदि जांच जारी थी, तो प्रेस नोट में जल्दबाजी में केवल एक आरोपी का नाम क्यों जारी किया गया।
उल्लेखनीय है कि देवास जिले में धावड़ा एवं सलई गोंद के संग्रहण पर पहले से प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद क्षेत्र में लगातार इस तरह की गतिविधियां सामने आना वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है।
कार्रवाई के दौरान परिक्षेत्र सहायक भागीरथ टाटू, बीटगार्ड कमलेश प्रजापति, सचिन जोशी, सुरक्षा श्रमिक रमेश एवं वाहन चालक आदित्य वर्मा मौजूद रहे।
अब देखना होगा कि वन विभाग इस विरोधाभास पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या वास्तव में सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है या मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।

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