
वार्ड नंबर 6 में बिजली संकट: विद्युत विभाग की लाचारी और जनप्रतिनिधि की उदासीनता से जनता त्रस्त
]: स्थानीय विद्युत विभाग की लचर व्यवस्था और बदहाली का खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शहर के वार्ड नंबर 6 में बिजली की अघोषित कटौती, लो-वोल्टेज और आए दिन तारों के टूटने की समस्या से स्थानीय निवासी बेहद परेशान हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में घंटों बिजली गुल रहना अब यहां की नियति बन चुकी है।
अंधेरे में वार्ड, अपनी ही दुनिया में मगन प्रतिनिधि
एक तरफ जहां जनता बूंद-बूंद पानी और बिजली के एक-एक पल के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ वार्ड नंबर 6 के स्थानीय जनप्रतिनिधि का रवैया बेहद सुस्त और उदासीन बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। वे अपनी ही दुनिया में मगन हैं।
“चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेताजी अब संकट के समय फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझते। वार्ड की सुध लेने वाला कोई नहीं है।”
विद्युत विभाग की लापरवाही चरम पर
वार्ड नंबर 6 के निवासियों का कहना है कि विद्युत विभाग के अधिकारी सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिलाते हैं। जर्जर तार, लटकते पोल और आए दिन फुंकने वाले ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन विभाग कान में तेल डालकर सोया हुआ है। हल्की सी आंधी या बारिश होते ही पूरी रात वार्ड अंधेरे के आगोश में समा जाता है।
प्रमुख समस्याएं जिससे जूझ रही है जनता:
अघोषित बिजली कटौती: बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों बिजली बंद रहना।
लो-वोल्टेज की मार: वोल्टेज कम होने के कारण कूलर, पंखे और पानी की मोटरें शोपीस बनकर रह गई हैं।
बिजनेस और पढ़ाई ठप: बिजली न होने से दुकानदारों का धंधा मंदा पड़ गया है और बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधि की गुमशुदगी: संकट के समय जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
वार्ड के आक्रोशित नागरिकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत विभाग ने अपनी व्यवस्था में सुधार नहीं किया और स्थानीय प्रतिनिधि ने अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं तोड़ी, तो वार्ड नंबर 6 की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम करने के लिए मजबूर होगी। जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि की होगी।

