नगर निगम की घोर लापरवाही: 6 महीने से वेतन को तरस रहे प्लेसमेंट कर्मचारी, 3 दिन से हड़ताल;*
आंधी-बारिश के बीच अंधकार में डूबे कई वार्ड
_संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव_
*नगर निगम की घोर लापरवाही: 6 महीने से वेतन को तरस रहे प्लेसमेंट कर्मचारी, 3 दिन से हड़ताल;* आंधी-बारिश के बीच अंधकार में डूबे कई वार्ड
नगर संवादाता, [राजनांदगांव]
नगर निगम की घोर ‘बदइंतजामी’ और संवेदनहीनता का खामियाजा एक बार फिर आम जनता और गरीब कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। एक तरफ जहां पिछले दिनों हुई तेज आंधी और झमाझम बारिश ने बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ शहर को इस संकट से उबारने वाले नगर निगम के प्लेसमेंट कर्मचारी पिछले तीन दिनों से काम बंद कर हड़ताल पर बैठ गए हैं।
वजह बेहद हैरान करने वाली है—इन कर्मचारियों को पिछले 6 महीनों से फूटी कौड़ी (वेतन) नहीं मिली है। पेट की भूख और परिवार पालने की मजबूरी में अब कर्मचारियों ने “नो पे, नो वर्क” (काम बंद, कलम बंद) का रास्ता चुन लिया है।
अंधेरे में डूबा शहर, 300 से अधिक शिकायतें पेंडिंग
आंधी-बारिश के कारण कई वार्डों में पेड़ गिरने और बिजली के तार टूटने से बत्ती गुल है। अमूमन ऐसी स्थिति में युद्ध स्तर पर काम करने वाला अमला इस समय गायब है। हालात यह हैं कि निगम के शिकायत केंद्र और हेल्पलाइन नंबरों पर अब तक 300 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन उन्हें अटेंड करने वाला कोई नहीं है। प्रभावित इलाकों के लोग पिछले 48 से 72 घंटों से अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। पानी की सप्लाई भी प्रभावित होने लगी है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
“6 महीने से नहीं मिला वेतन, कैसे पालें परिवार?”
हड़ताल पर बैठे प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द फुटपाथ पर छलक आया है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा:
“हम अपनी जान जोखिम में डालकर चौबीसों घंटे शहर की सेवा करते हैं। लेकिन निगम प्रशासन इतना संवेदनहीन है कि हमें 6 महीने से वेतन नहीं दिया गया है। हमारे बच्चों की स्कूल की फीस बाकी है, राशन वाले ने उधार देना बंद कर दिया है। हम भूखे पेट कब तक काम करें? जब तक हमारा पूरा बकाया नहीं मिलता, हम काम पर नहीं लौटेंगे।”
निगम प्रशासन मौन, ठेकेदार और अफसरों की जुगलबंदी?
इस पूरे मामले में नगर निगम के आला अधिकारियों ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। सूत्रों की मानें तो प्लेसमेंट एजेंसी (ठेकेदार) और निगम के अफसरों के बीच बिलों के भुगतान को लेकर खींचतान चल रही है, जिसका खामियाजा इन गरीब रोजमर्रा के कामगारों को भुगतना पड़ रहा है। जनता अब सीधे तौर पर सवाल उठा रही है कि जब हर महीने टैक्स वसूला जाता है, तो बजट कहां गायब हो जाता है?
प्रमुख बिंदु :
6 महीने से वेतन ठप: प्लेसमेंट कर्मचारियों के घरों में चूल्हा जलना मुश्किल।
3 दिन से हड़ताल: बिजली और सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई।
300+ शिकायतें: आंधी-बारिश के बाद जनता त्रस्त, सुनने वाला कोई नहीं।
अंधकार में वार्ड: फॉल्ट सुधारने वाला मैदानी अमला काम से बाहर।
संपादकीय टिप्पणी: यह स्थिति प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘सुविधाओं’ के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी ढांचा संभालने वाले कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। यदि प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप कर कर्मचारियों का वेतन जारी नहीं किया, तो आने वाले दिनों में शहर की स्थिति महामारी और पूर्ण अंधकार की ओर बढ़ सकती है।
