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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् का 98वाँ स्थापना दिवस

भरतपुर में पौधारोपण एवं किसान संवाद कार्यक्रम आयोजित

भरतपुर।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान परिसर में पौधारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के संकल्प के साथ पौधे लगाए। इसके बाद संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, नई दिल्ली से आयोजित आईसीएआर स्थापना दिवस समारोह का ऑनलाइन प्रसारण देखा।

समारोह के मुख्य अतिथि एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारत के कृषि परिवर्तन का अग्रदूत है। परिषद के वैज्ञानिकों के अनुसंधान एवं नवाचारों के परिणामस्वरूप देश ने खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध एवं मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में आईसीएआर ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनमें 94 प्रतिशत जलवायु-सहनशील तथा 29 जैव-संपोषित (बायोफोर्टिफाइड) किस्में शामिल हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना करते हुए जलवायु परिवर्तन और उपभोक्ताओं की बदलती मांग को ध्यान में रखकर उत्पाद-उन्मुख तथा मांग-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी एवं रामनाथ ठाकुर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य के. वी. राजू तथा मत्स्य पालन विभाग के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार भी उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने परिषद की पिछले एक वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों तथा भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली की प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान में 55 किसानों की सहभागिता के साथ किसान संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. विजय वीर सिंह ने किसानों को आईसीएआर की उपलब्धियों से अवगत कराते हुए सरसों की उन्नत उत्पादन तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। इस दौरान डॉ. आर. एस. जाट, डॉ. भागीरथ राम एवं डॉ. हरवीर सिंह ने सरसों की नवीनतम उत्पादन तकनीकों, उन्नत किस्मों तथा फसल प्रबंधन की जानकारी दी और किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम के अंत में किसानों को कृषि आदान भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत यादव, डॉ. हरवीर सिंह तथा तकनीकी अधिकारी श्री रामचन्द्र मीना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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