
हनुमान जी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा के एक अद्वितीय आदर्श – स्वामी मुक्तिनाथानन्द
प्रातः 7 बजे मंदिर प्रांगण में तथा सायं मंदिर के भीतर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ संपन्न हुआ। संध्या आरती के पश्चात पूर्णिमा के उपलक्ष्य में सांय श्यामनाम संकीर्तन सम्पन्न हुआ तत्पश्चात “हनुमान जी के महान जीवन एवं अमर शिक्षाओं” विषय पर रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा एक प्रेरणादायी प्रवचन दिया गया। स्वामी जी ने बताया कि हनुमान जी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा के एक अद्वितीय आदर्श हैं। उनका जीवन साहस, भक्ति, सेवा और विनम्रता का प्रतीक है। वे श्रीराम के परम भक्त थे और उन्होंने अपने समर्पण से यह सिद्ध किया कि सच्ची भक्ति में अपार शक्ति होती है। हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि किसी भी कार्य में सफलता के लिए आत्मविश्वास और निष्ठा अत्यंत आवश्यक हैं। जब वे लंका की ओर समुद्र पार करने जा रहे थे, तब प्रारंभ में उन्हें अपनी शक्ति का ज्ञान नहीं था, लेकिन जामवंत के स्मरण दिलाने पर उन्होंने अपनी क्षमता को पहचाना और असंभव कार्य को संभव कर दिखाया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि हमारे भीतर असीम संभावनाएं छिपी होती हैं, जिन्हें पहचानना आवश्यक है।
स्वामी जी कहा कि हनुमानजी की एक और महान शिक्षा है—नि:स्वार्थ सेवा। हनुमान जी ने कभी अपने कार्यों का श्रेय नहीं लिया, बल्कि हर सफलता का श्रेय श्रीराम को दिया। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें अहंकार से दूर रहकर समाज और दूसरों की सेवा करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, हनुमान जी का जीवन हमें विनम्रता और संयम का भी पाठ पढ़ाता है। अत्यंत शक्तिशाली होने के बावजूद वे सदैव नम्र और अनुशासित रहे। यह दर्शाता है कि सच्ची महानता शक्ति में नहीं, बल्कि उसके सही उपयोग में होती है।
निष्कर्ष रूप में स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि हनुमान जी का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि दृढ़ विश्वास, कर्तव्यनिष्ठा और भक्ति के मार्ग पर चलकर हम अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।




