मोदी है तो मुमकिन नहीं… सुरक्षित भी है!”*
देश में कुछ लोग सुबह उठते ही चाय नहीं, बल्कि “मोदी हटाओ” का काढ़ा पीते हैं। पेट्रोल के दाम बढ़े तो मोदी दोषी, बारिश कम हुई तो मोदी दोषी, और अगर विपक्ष चुनाव हार जाए तो सीधा ईवीएम दोषी! जनता भी सोच में पड़ गई है कि आखिर विपक्ष चुनाव लड़ता है या बहाने ढूंढता है?
*“मोदी है तो मुमकिन नहीं… सुरक्षित भी है!”*
शेखर ठाकुर(छत्तीसगढ़ स्टेट हेड )
देश में कुछ लोग सुबह उठते ही चाय नहीं, बल्कि “मोदी हटाओ” का काढ़ा पीते हैं। पेट्रोल के दाम बढ़े तो मोदी दोषी, बारिश कम हुई तो मोदी दोषी, और अगर विपक्ष चुनाव हार जाए तो सीधा ईवीएम दोषी! जनता भी सोच में पड़ गई है कि आखिर विपक्ष चुनाव लड़ता है या बहाने ढूंढता है?
आज दुनिया युद्ध, महंगाई और ईंधन संकट से जूझ रही है। बड़े-बड़े देशों में पेट्रोल के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन भारत में हालात फिर भी नियंत्रण में हैं। अगर कोई और सरकार होती तो शायद पेट्रोल के दाम आसमान में झूला झूल रहे होते। मगर नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने देश को इस तरह संभाला कि जनता को झटका कम लगे और व्यवस्था बनी रहे।
बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक चुनाव जीतना कोई बच्चों का खेल नहीं था। जनता ने वोट दिया, भरोसा दिया और मोदी नाम पर मुहर लगाई। लेकिन विपक्ष कहता है—“ईवीएम खराब है!”
अरे भाई, जब जीतते थे तब ईवीएम माता थी क्या?
मोदी ने अपना घर-द्वार छोड़कर देश को परिवार बनाया। दिन-रात एक कर देश को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी। मगर कुछ लोग महतारी वंदन का लाभ भी लेंगे, मुफ्त योजनाओं का फायदा भी उठाएंगे और फिर सोशल मीडिया पर बैठकर कहेंगे—“देश खतरे में है!”
वाह रे राजनीति! थाली भी सरकार की और छेद भी उसी में!
देश अब भावनाओं से नहीं, भरोसे से चल रहा है। जनता समझ चुकी है कि चौकीदार अगर जाग रहा है तो देश सुरक्षित है। मोदी हर अग्नि परीक्षा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष अब परीक्षा देने से पहले ही कॉपी फाड़ने में लगा है।
आज सवाल ईवीएम का नहीं, नीयत का है। अगर जनता मोदी के साथ है तो मशीन से डर कैसा? या फिर हार का बहाना पहले से तैयार रखा जा रहा है?
देश आगे बढ़ रहा है, और जो लोग लालच, मुफ्तखोरी और अफवाहों के सहारे राजनीति का सपना देख रहे हैं, उन्हें जनता अब धीरे-धीरे पहचान रही है। क्योंकि हिंदुस्तान अब केवल नारों से नहीं, काम से चलता है।
“मोदी पर दोष थोपने से पहले, आईना देखना भी जरूरी है…”
“””जिनके अपने घर बर्बाद हुए पड़े रहते हैँ वो दुसरो के घरों मे बैठके उनके घर क़ो बैठने की सलाह देते हैँ,,, क्युकी खाली लोगो के पास काम होता नहीं वे सदा दुसरो के उपर टिका टिपण्णी करना हैँ और खोट निकालना यही उनका मुख्य उद्देश्य रहता हैँ वो देश की राजनीति हो या फिर आम लोगो की बात हो ये ही कटु सत्य हैँ!!


