स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण के बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय की नहीं सुधरी व्यवस्थाएं
डॉक्टरों,टेक्नीशियनों,सफाई कर्मियों की कमी के साथ ट्रामा सेंटर ना होना लोगों के लिए बना जी का जंजाल

ब्यूरो चीफ आयुष त्रिपाठी
गुरसरांय (झांसी)। जिले का सबसे दूरी पर बना गरौठा,टहरौली तहसील क्षेत्र का प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय इन दिनों झांसी जिले के लेकर मंडल और प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की अनदेखी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं गुरसरांय में बुरी तरह लड़खड़ा गई हैं यहां पर कई आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों से लेकर कई स्वास्थ्य परीक्षण अल्ट्रासाउंड आदि मशीनों को चलाने के लिए भी टेक्नीशियनों की न के बराबर उपलब्धता होने से आमजन की स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पढ़ रहा है उधर आए दिन गुरसरांय नगर प्रमुख मार्गों का केंद्र बिंदु होने के चलते सड़क मार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय लाया जाता है तो यहां पर डॉक्टरों से लेकर ट्रामा सेंटर आदि उपलब्धता न होने के चलते ऐसे गंभीर घायलों को झांसी रेफर कर दिया जाता है जिससे उनकी इलाज के अभाव में झांसी पहुंचते-पहुंचते मौत हो जाती है। उधर वार्ड बॉय से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और सफाई कर्मियों की गुरसरांय में भारी कमी है जो वार्ड बॉय गुरसरांय में तैनात है उनको गुरसरांय कैंप में रहने की व्यवस्था न होने के चलते झांसी रहना पड़ता है और जब वह झांसी से गुरसरांय ड्यूटी के लिए आते हैं तो उनकी गुरसरांय सरकारी अस्पताल में प्रभारी द्वारा ड्यूटी करने के बाद भी अनुपस्थित लगा दी जाती है इस संबंध में वार्ड बॉय धर्मेंद्र ने अपने शिकायती पत्र अधिकारियों को देते हुए बताया है कि उसकी गैर हाजिरी न होने के बाद भी उसकी दो दिन की वेतन काट ली गई है इसी प्रकार इतने बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र एक सफाई कर्मी तैनात है जिससे जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों से लेकर प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों और स्वास्थ्य मंत्रालय की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं क्योंकि वर्ष 2025 में 18 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने स्वयं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय का निरीक्षण कर सफाई से लेकर कई गंभीर अनियमिताएं पाई थी और सुधार के सख्त आदेश भी दिए थे लेकिन उनके जाने के बाद से हालात सुधरने की जगह और बिगड़ गाएं है यहां पर डॉक्टरों से लेकर स्टाफ को रहने के लिए आवासों की भारी कमी है और जो डॉक्टर भी यहां तैनात है वो कब आते है कब जाते हैं कोई अता पता नहीं है इस प्रकार स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहतर की जाए की ओर कोई ध्यान नहीं है और वास्तव में भारी अव्यवस्था के चलते काम करने वाले डॉक्टरों से लेकर विभाग का स्टाफ यहां से नदारत रहता है वही यहां पर कोई भी लिपिक से लेकर कोई बाबू दशकों से तैनात नहीं है जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग का एक सुपरवाइजर उक्त पूरा काम देखता है फिर वह अपनी वास्तविक तैनाती में क्या काम देखता होगा जिसके चलते आर्थिक अनियमिताएं किया जाना चर्चित है। गुरसरांय नगर समेत क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन व शासन से उक्त संबंध में जल्द कार्रवाई की मांग की है।




