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राजनांदगांव में दो दिनों की आफत की बारिश:

जिला अस्पताल बना 'स्विमिंग पूल', सड़कों पर जानलेवा गड्ढों से सहमे लोग;

*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव* 

  •  *राजनांदगांव में दो दिनों की आफत की बारिश: जिला अस्पताल बना ‘स्विमिंग पूल’, सड़कों पर जानलेवा गड्ढों से सहमे लोग;*

प्रशासन मौन

राजनांदगांव।

पिछले दो दिनों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने राजनांदगांव शहर की सूरत बिगाड़ कर रख दी है। नगर निगम के दावों की पोल खोलती इस बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि आम लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है, वहीं जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी इस आपदा के बीच चुप्पी साधे बैठे हैं।

जिला अस्पताल में भरा पानी, मरीज बेहाल

बारिश का सबसे खौफनाक और शर्मनाक नजारा जिला अस्पताल में देखने को मिला। जीवनदायिनी कहा जाने वाला यह अस्पताल इस वक्त खुद ‘स्विमिंग पूल’ में तब्दील हो चुका है। अस्पताल के वार्डों, गलियारों और परिसर में घुटनों तक पानी भर गया है। मरीज और उनके परिजन बेड पर दुबकने को मजबूर हैं। दवाइयों के स्टॉक और चिकित्सा उपकरणों के भी भीगने की खबर है। गंभीर स्थिति में इलाज कराने आए मरीजों को अब संक्रमण फैलने का डर सता रहा है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और ड्रेनेज अमला नदारद है।

सड़कों पर ‘जानलेवा’ गड्ढे, लगातार हो रही दुर्घटनाएं

शहर की मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी इलाकों की सड़कें तालाब जैसी नजर आ रही हैं। पानी भरे होने के कारण सड़कों पर बने बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई नहीं दे रहे हैं, जो अब राहगीरों के लिए मौत का कुआं साबित हो रहे हैं। पिछले २४ घंटों में शहर के अलग-अलग चौकों पर दर्जनों दोपहिया वाहन चालक इन अदृश्य गड्ढों का शिकार होकर चोटिल हो चुके हैं। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है।

प्रशासन का ‘मौन’ रवैया, जनता में भारी आक्रोश

मानसून से पहले नालियों की सफाई और सड़कों की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने का दम भरने वाला नगर निगम प्रशासन पूरी तरह से मौन है। ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से चोक हो चुका है। जलभराव की शिकायत करने के बाद भी न तो कोई अधिकारी मौका मुआयना करने पहुंचा है और न ही पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है:

“हर साल टैक्स देने के बाद भी हमें यह नरक भुगतना पड़ रहा है। जिला अस्पताल की यह हालत बताती है कि हमारी जान की प्रशासन की नजर में क्या कीमत है।”

यदि अगले २४ घंटों में बारिश नहीं थमी और प्रशासन ने मुस्तैदी नहीं दिखाई, तो शहर की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल जनता इस बदहाली के बीच खुद को बेसहारा महसूस कर रही है।

शेखर ठाकुर संपादक

शेखर ठाकुर वर्तमान में भारत संवाद न्यूज़ चैनल और दैनिक संवाद अपडेट समाचार पत्र में छत्तीसगढ़ संपादक के रूप कार्यभार संभाल रहे हैं। पत्रकारिता के प्रति अपने समर्पण और स्थानीय मुद्दों पर गहरी पकड़ के लिए पहचाने जाने वाले शेखर, छत्तीसगढ़ की हर छोटी-बड़ी खबर को प्रमाणिकता के साथ जनता और प्रशासन तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

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