*छुईखदान के जंगल में हसदेव जैसा मंजर, 116 एकड़ में सैकड़ों बेशकीमती पेड़ों की बलि, प्रशासन मौन*
*संवाददाता संगीता सिंह की रिपोर्ट राजनांदगांव, छुईखदान। 6 अक्टूबर 2026*
*सीमांकन होते ही शुरू हुई साजा-बीजा, तिनसा और बांस की अंधाधुंध कटाई, बिना अनुमति महीनेभर से गरमाया इलाका*
छुईखदान के रेवाडीह जंगल में इन दिनों हसदेव अरण्य जैसी तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। सीमांकन के नाम पर लगभग 116 एकड़ निजी भूमि की आड़ लेकर सैकड़ों हरे-भरे और बेशकीमती पेड़ों को जड़ से उखाड़ा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस जगह पर इतनी बड़ी कटाई चल रही है, वहां प्रशासन और वन विभाग दोनों ही मौन साधे हुए हैं।
*सीमांकन के तुरंत बाद शुरू हुआ जंगल सफाया*
जानकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले ही राजस्व विभाग द्वारा इस इलाके में सीमांकन की कार्रवाई पूरी की गई थी। सीमांकन खत्म होते ही जंगल के भीतर अचानक भारी मशीनें और मजदूर सक्रिय हो गए। इसके बाद साजा-बीजा, तिनसा, बांस और अन्य बेशकीमती प्रजातियों के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई शुरू कर दी गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस तेजी से जंगल उजाड़ा जा रहा है उससे पूरा क्षेत्र बीहड़ में तब्दील हो जाएगा। रेवाडीह जंगल को क्षेत्र का “फेफड़ा” कहा जाता था। यहां से गुजरने वाले वन्यजीवों और आसपास के गांवों के लिए यह जंगल जीवनदायिनी था।
*बिना अनुमति चल रहा खेल*
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई बिना वन विभाग की अनुमति के कैसे हो रही है? नियमानुसार निजी भूमि पर भी 10 से अधिक पेड़ काटने के लिए वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन यहां सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं और अभी भी कटाई जारी है।
ग्रामीणों ने बताया कि नगर वन अमले को इसकी जानकारी दे दी गई है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। इससे प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*”हसदेव की तरह उजड़ रहा जंगल”*
स्थानीय पर्यावरण प्रेमी संगठनों ने कहा कि रेवाडीह में जो हो रहा है वह हसदेव अरण्य की याद दिलाता है। वहां भी इसी तरह पहले सीमांकन हुआ, फिर कोयला खनन के नाम पर लाखों पेड़ काट दिए गए। यहां भी “निजी भूमि” का बहाना बनाकर जंगल को खत्म किया जा रहा है।
जंगल खत्म होने से क्षेत्र का जलस्तर गिरेगा, गर्मी बढ़ेगी और वन्यप्राणियों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। बीते एक महीने से लगातार चल रही कटाई से पूरा इलाका वीरान होता जा रहा है।
*वन विभाग ने कहा – जांच के बाद होगी कार्रवाई*
इस संबंध में जब वन विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जंगल में हो रही कटाई की शिकायत मिली है। जांच दल भेजा जा रहा है। यदि बिना अनुमति के पेड़ काटे गए हैं तो वन संरक्षण अधिनियम 1980 और भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषियों पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है।
*ग्रामीणों की मांग: तुरंत रुके कटाई*
ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से पेड़ों की कटाई रुकवाई जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों की मिलीभगत से यह हो रहा है, उन पर भी कार्रवाई हो।
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