ठाना घाट कीचड़ में फंसी सियासत: गिट्टी डलते ही श्रेय की जंग, विधायक के प्रयास और परिषद की कार्रवाई पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने सोशल मीडिया पर भी गरमाई बहस, गिट्टी डलवाने को लेकर दावों और जवाबी दावों का दौर तेज।
कांटाफोड़- नगर के वार्ड क्रमांक 15 स्थित ठाना घाट मार्ग पर लगातार बारिश के कारण सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित होने लगा स्थिति को देखते हुए नगर परिषद ने लोगों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से मार्ग पर गिट्टी डलवाई। हालांकि यह राहत कार्य शुरू होते ही राजनीतिक रंग ले बैठा और कांग्रेस व भाजपा के बीच श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई।
ठाना घाट मार्ग पर कीचड़ के कारण पैदल राहगीरों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय स्तर पर शिकायतें बढ़ने के बाद नगर परिषद ने मार्ग पर गिट्टी डलवाकर आवागमन को सुचारु बनाने का प्रयास किया। फिलहाल यह व्यवस्था अस्थायी राहत के रूप में की गई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लंबे समय से इस मार्ग की समस्या को लगातार उठाया जा रहा था। उनके अनुसार ज्ञापन, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात और प्रशासन पर बनाए गए दबाव के बाद ही नगर परिषद को कार्रवाई करनी पड़ी। कांग्रेस का दावा है कि जनता की आवाज उठाने का ही परिणाम है कि लोगों को राहत मिल सकी।
वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि क्षेत्रीय विधायक के लगातार प्रयास, अधिकारियों से समन्वय और प्रदेश सरकार की विकासोन्मुखी कार्यशैली के चलते समस्या का तत्काल संज्ञान लिया गया। भाजपा का दावा है कि विधायक ने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर लोगों को राहत दिलाने के लिए पहल की, जिसके बाद मार्ग पर गिट्टी डलवाई गई।
इस पूरे घटनाक्रम में नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी मुकेश चौबे की भूमिका भी अहम रही। मार्ग की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने परिषद अमले को तत्काल मौके पर भेजकर गिट्टी डलवाने की व्यवस्था कराई, ताकि बारिश के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित न हो और लोगों को तत्काल राहत मिल सके।
सोशल मीडिया पर छिड़ी श्रेय की जंग
गिट्टी डलने के बाद मामला सोशल मीडिया तक पहुंच गया। स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुपों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो, संदेश और पोस्ट साझा किए जाने लगे। कांग्रेस और भाजपा समर्थक अपने-अपने नेताओं के प्रयासों का हवाला देते हुए राहत कार्य का श्रेय लेने में जुट गए। एक पक्ष इसे विधायक की सक्रियता का परिणाम बता रहा है, तो दूसरा नगर परिषद की कार्रवाई और कांग्रेस के दबाव का असर बता रहा है। देखते ही देखते ठाना घाट का मुद्दा सड़क की समस्या से आगे बढ़कर सोशल मीडिया पर सियासी बहस का विषय बन गया।
फिलहाल ठाना घाट मार्ग पर डली गिट्टी से अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि राहत दिलाने का श्रेय आखिर किसे मिले। जबकि क्षेत्र के लोग अब भी इस मार्ग के स्थायी और गुणवत्तापूर्ण निर्माण का इंतजार कर रहे हैं।



