बाडी बुआई की साथ हुई निमाड़ के महापर्व गणगौर की शुरुआत
तीज के दिन खुलेंगे माता की बाड़ी के पठ

सनावद – निमाड़ के लोक संस्कृति के महापर्व गणगौर माता की बाड़ी बोने से प्रारम्भ होते ही घरों में पर्व से जुड़े लोकगीत सुनाई दे रहे है। माता की बाड़ी बोने के साथ शनिवार से पर्व की शुरुआत हुई। माता की बाड़ियों में भी गणगौर माई के गीत गूंजने लगेंगे।
पर्व का प्रभाव बाजार में कुछ खास दिखाई नहीं दे रहा है। किराणा, कपड़ा सहित अन्य दुकानों पर ग्राहकी नहीं के बराबर देखी जा रही है। क्षेत्र में भीषण गर्मी का असर है, लेकिन लोक संस्कृति के उल्लास के कारण बाजार में रौनक कम है। निमाड़ अंचल में गणगौर हिंदुओं का सबसे बड़ा लोकपर्व माना जाता है। हर साल चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पर्व मनाया जाता है। यह लोकपर्व मध्य प्रदेश व राजस्थान में धूमधाम से लोग मनाते हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल पंचमी तक पूरे निमाड़ में गणगौर लोकपर्व का खासा उत्साह रहता है। गणगौर शब्द गण और गौरा से मिलकर बना है। गण का अर्थ शिवजी से है, गौरा का अर्थ माता पार्वती से है। इस पर्व में शिव व पार्वती दोनों की आराधना की जाती है। लोकपर्व गणगौर की शुरुआत शनिवार को जवारे बुआई के साथ हुई। आस्था, उत्साह व उमंग के साथ क्षेत्र में गणगौर पर्व उल्लास से मनाया जाएगा।
बावड़ी मंदिर पुजारी पं. उमाशंकर दिनकरराव कानूनगो ने बताया गणगौर महोत्सव की शुरुआत शनिवार को गणगौर माता की मूठ बाड़ी में रखने से हुई । 21मार्च तीज को गणगौर माता को प्रथम दिन पाठ बैठाया जाएगा। इससे पहले माता की बाड़ी को लोगों के दर्शनार्थ व पूजन के लिए खोली जाएगी। 22 मार्च को गणगौर माता के रथ के बौड़ाए जाएंगे। 23 मार्च गणगौर माता जोड़े जिमाने व दूसरी बार बोड़ाने या विसर्जन की प्रक्रिया होगी। नगर में कई स्थानों पर माता की बाड़ियां परंपरागत रूप से बोई जाती है


