युवाओं को हुनरमंद बनाना ही राष्ट्र निर्माण की असली सेवा:- कुलमी

रिपोर्ट:- सुरेश चौहान (9571081159)
पिण्डवाड़ा।– कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से श्री वर्धमान संस्कृति सेवा धाम (मुंबई–सूरत) द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह एवं “उत्कर्ष साधार्मिक भक्ति” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आचार्य कुलचन्द्र सूरीश्वरजी महाराजा की पावन निश्रा में सूरत स्थित श्री उमरा श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में संपन्न हुआ।
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रमुख अतिथियों में मुंबई हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस के. के. तातेड, डॉ. सी. एल. चौहान, राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री जगदीश कुलमी, प्रख्यात कार्डियो सर्जन डॉ. भूपेशभाई शाह, संस्था के ऑल इंडिया प्रेसिडेंट महेशभाई साकरिया सहित कई गणमान्य व्यक्तित्व शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान संस्था द्वारा इस वर्ष 300 से अधिक युवक-युवतियों को कंप्यूटर टैली, डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक्स डिजाइनिंग, मेहंदी डिजाइन एवं नेल आर्ट जैसे तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के प्रमाण पत्र वितरित किए गए। संस्था ने यह भी जानकारी दी कि अब तक 8,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा चुका है।
अपने संबोधन में जगदीश कुलमी ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “युवाओं को हुनरमंद बनाना ही राष्ट्र निर्माण की असली सेवा है।”
उन्होंने वनवासी कल्याण परिषद के विभिन्न सेवा प्रकल्पों की जानकारी देते हुए “कमली प्रोजेक्ट” का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह परियोजना जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस परियोजना के तहत महिलाएं ऊन एवं कपड़े से कमली (चादर), शॉल, स्वेटर, टोपी, मफलर, बैग, दरी, गलीचे एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।
समारोह में संस्था के सचिव अशोक कोठारी सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए साधार्मिक भक्ति (भोजन प्रसाद) का आयोजन किया गया।
आयोजकों ने बताया कि संस्था का उद्देश्य “सक्षम जैन समाज – सशक्त जैन समाज” की परिकल्पना को साकार करना है। इस अवसर पर जैन समाज के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम धार्मिक और सामाजिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया।



