जुलाई में बिजली बिल का ‘करंट’:
उपभोक्ताओं पर पड़ेगी दोहरी मार*
*संगीता सिंह, संवाददाता राजनांदगांव*

आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी खबर की, जिसने राजनांदगांव सहित पूरे प्रदेश के आम आदमी के घर का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। तपती गर्मी और उमस के बीच जनता को एक तरफ जहां बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ अब बिजली विभाग आम उपभोक्ताओं को एक बड़ा झटका देने की तैयारी में है।
*जुलाई में बिजली बिल का ‘करंट’: उपभोक्ताओं पर पड़ेगी दोहरी मार*
पहले से ही भीषण गर्मी के कारण घरों में एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल बढ़ने से लोग इस महीने दोगुने बिजली बिल की मार झेल रहे हैं। लेकिन परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। अब बिजली कंपनियों ने टैरिफ (दरों) में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे आम जनता पर दोहरी मार पड़ने वाली है।
बड़ी बात: लगातार पिछले तीन महीनों से बिजली के दामों और बिलों में जो बढ़ोतरी देखी जा रही थी, वह जुलाई के इस नए झटके के साथ अब आम आदमी की जेब पूरी तरह ढीली करने वाली है।
प्रति 100 यूनिट पर ₹30 तक का अतिरिक्त भार
अगर हम इस गणित को सीधे शब्दों में समझें, तो नए टैरिफ प्लान के लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को प्रति 100 यूनिट की खपत पर लगभग 30 रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
मध्यमवर्गीय परिवारों पर असर: जो परिवार हर महीने औसतन 200 से 300 यूनिट बिजली की खपत करते हैं, उनके बिल में सीधे तौर पर 60 से 90 रुपये सिर्फ इस बढ़े हुए टैरिफ के जुड़ जाएंगे।
दोगुना बिल और ऊपर से सरचार्ज: गर्मी के कारण बढ़ी हुई यूनिट्स का बढ़ा हुआ बिल तो आएगा ही, साथ ही प्रति यूनिट महंगी हुई बिजली इस दर्द को और बढ़ा देगी।
ग्राउंड जीरो से जनता की आवाज: “बजट पूरी तरह ध्वस्त”
राजनंदगांव के स्थानीय निवासियों और गृहणियों का कहना है कि मानसून की खटास और उमस के बीच बिजली की खपत कम नहीं हो रही है। ऐसे में लगातार तीसरे महीने बिल का बढ़ना किसी बड़े झटके से कम नहीं है। राशन, सब्जी और बच्चों की स्कूल फीस के बीच अब यह महंगा बिजली बिल लोगों के घरेलू बजट को पूरी तरह से ध्वस्त कर रहा है।
विभाग का तर्क है कि बुनियादी ढांचे में सुधार और कोयले की कीमतों के तालमेल के लिए दरों में आंशिक बदलाव जरूरी था, लेकिन धरातल पर जनता त्रस्त नजर आ रही है।
अब देखना यह होगा कि इस दोहरी मार के बीच क्या प्रशासन या सरकार उपभोक्ताओं को किसी तरह की कोई राहत (जैसे हाफ बिजली बिल योजना के दायरे में बदलाव) देती है, या फिर इस सावन में भी जनता को महंगी बिजली के ही आंसू रोने पड़ेंगे।

