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महासमुंद में जमीन घोटाले का भयंकर खेल.! आरटीआई मांगी तो तहसीलदार ने नंबर बदल दिया, बोला- “आ जाओ ऑफिस में देख लो”

महासमुंद में जमीन घोटाले का भयंकर खेल.! आरटीआई मांगी तो तहसीलदार ने नंबर बदल दिया, बोला- "आ जाओ ऑफिस में देख लो"

महासमुंद में जमीन घोटाले का भयंकर खेल.! आरटीआई मांगी तो तहसीलदार ने नंबर बदल दिया, बोला- “आ जाओ ऑफिस में देख लो”

 

तिलक राम पटेल महासमुंद ब्यूरोचिफ भारत संवाद टीवी न्यूज चैनल दैनिक अपडेट अखबार

महासमुंद | 07 जुलाई 2026 (मंगलवार)

राजस्व विभाग में घोटालेबाजी की नई सनसनीखेज मिसाल सामने आई है। जब स्थानीय पत्रकार मयंक गुप्ता ने ग्राम पंचायत मूढ़ेना के विवादित खसरा नंबरों की जानकारी आरटीआई के जरिए मांगी, तो तहसीलदार कार्यालय का जवाब देखकर सबके होश उड़ गए। न मांगी गई जानकारी दी गई, न दस्तावेज उपलब्ध कराए गए — उल्टा खसरा नंबर बदल दिए गए और आवेदक को ऑफिस बुलाकर तलब कर लिया गया।

पत्रकार ने क्या-क्या खंगाला था..?

मयंक गुप्ता (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रोड, पंकज इलेक्ट्रिकल्स के बाजू, महासमुंद) ने आरटीआई में सनसनीखेज सवाल पूछे थे।

खसरा नंबर 680 और 681 (जो पहले खसरा नंबर 94 से बने) का विभाजन आदेश और बंटवारा कैसे हुआ..?

 

इन खसरों का पिछले 30 वर्षों का पूरा बी-1 रिकॉर्ड, नामांतरण और पंचायत की प्रमाणित प्रतियां।

 

खसरा 439 से संबंधित श्रीमती ज्योत्सना कन्नौजे के नाम हस्तांतरण/नामांतरण के सभी दस्तावेज।

 

क्या ये जमीनें चारागाह या सामलात (सरकारी) श्रेणी की हैं? अगर हैं, तो इन्हें निजी नाम पर ट्रांसफर करने की अनुमति किसने दी?

 

आवेदन में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का हवाला देते हुए साफ मांग की गई थी।

 

तहसीलदार का चौंकाने वाला जवाब

 

10 जून 2026 का तहसीलदार महासमुंद का पत्र अब वायरल हो रहा है। इसमें

 

आवेदक के बताए 680, 681 और 439 की जगह खसरा 863/1 लिख दिया गया।

 

कोई प्रमाणित दस्तावेज, आदेश या रिकॉर्ड नहीं दिया गया।

 

सिर्फ एक लाइन — “आवेदक कार्यालय में उपस्थित होकर देख लें”।

 

यह जवाब आरटीआई कानून का खुला मखौल है। सूचना देने के बजाय आवेदक को तलब करना — क्या विभाग कुछ बड़ा छुपा रहा है..?

 

सवालों की बाढ़

 

खसरा नंबर बदलने का खेल क्यों..?

 

सरकारी चारागाह/सामलात की जमीन निजी लोगों के नाम कैसे चली गई..?

 

पिछले 30 साल में इन खसरों पर कितने फर्जी नामांतरण हुए..?

 

पटवारी हल्का क्रमांक 37 की ये जमीनें करोड़ों की हैं — कौन-कौन मुनाफा कमा रहा है..?

 

अब होगा बड़ा खुलासा!

 

बेबाक बयान की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। महासमुंद जिले में फर्जी खरीदी-बिक्री, आबंटित भूमि और आदिवासी भूमि को प्लाटिंग करके बेचने का गठजोड़ उजागर होने वाला है।

 

बहुत जल्द महासमुंद तहसीलदार, एसडीएम, पटवारी, आरआई समेत बड़े-बड़े दिग्गजों के नाम इस घोटाले में सामने आने वाले हैं।

 

पत्रकार मयंक गुप्ता ने कहा,

 

“मैंने पारदर्शिता के लिए आरटीआई दी थी, लेकिन जवाब देखकर लगा कि विभाग कुछ बहुत बड़ा छुपा रहा है। खसरा नंबर बदलना और ऑफिस बुलाना — यह आरटीआई के साथ मजाक है। अब पूरा खेल खुलकर सामने आएगा।”

 

जिला प्रशासन, कलेक्टर और उच्चाधिकारी अब इस मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं — यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। क्या तहसीलदार से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा या फिर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा..?

 

बेबाक बयान लगातार इस पूरे जमीन घोटाले की निगरानी कर रहा है। अगर आपकी जमीन भी संदिग्ध तरीके से ट्रांसफर हुई है या आपके पास कोई सबूत/जानकारी है, तो तुरंत संपर्क करें।

 

जमीन माफिया और सरकारी अधिकारियों का गठजोड़ अब टूटने वाला है। महासमुंद में जल्द ही बड़े-बड़े सिर धड़ से अलग होने वाले हैं।

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